
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Nashik Jain Event: नासिक सारस्वत आचार्य श्री देवनंदिजी महाराज की प्रेरणा से निर्मित अध्यात्म और वास्तुकला के संगम ‘णमोकार तीर्थ’ में एक विशाल जैन पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन आगामी फरवरी माह में आयोजित होने वाले भव्य ‘अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव’ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम परम पूज्य सारस्वताचार्य प्रज्ञाश्रमण श्री 108 देवनंदिजी महाराज के पावन सानिध्य एवं मुनिश्री अमोघकीर्ति जी व मुनिश्री अमरकीर्ति जी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। तीर्थ दर्शन एवं समोशरण का निरीक्षण सम्मेलन का शुभारंभ प्रातः काल तीर्थ क्षेत्र के दर्शन के साथ हुआ। मुनिश्री अमरकीर्ति जी ने उपस्थित पत्रकारों को तीर्थ की अनुपम विशेषताओं से अवगत कराया।
उन्होंने यहां निर्मित भव्य ‘समोशरण रचना’ के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए सभी को इसका बारीकी से निरीक्षण करवाया, दोपहर के सत्र में आचार्य श्री एवं युगल मुनिश्री की उपस्थिति में अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं गणधाराचार्य कुंधुसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण किया गया।
पंडित विजयकुमार जैन के मंगलाचरण के पश्चात, उनके द्वारा ब्राह्मी लिपि में तैयार हस्तलिखित ‘भक्तामर ध्वज’ एवं विभिन्न भाषाओं में अनुवादित ‘णमोकार महामन्त्र पत्रक’ का भव्य विमोचन किया गया।
राष्ट्रसंत का संबोधन एवं सम्मान आचार्य श्री देवनंदिजी महाराज ने धर्म प्रभावना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह तीर्थ भविष्य में शोध का मुख्य केंद्र बनेगा।
वहीं, मुनिश्री अमोधकीर्ति जी ने पत्रकारों को इस पंचकल्याणक महोत्सव को अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने हेतु प्रेरित किया।
इस अवसर पर देशभर से आए पत्रकारों का शाल, माला और स्मृति चिह्न (मोमेटो) देकर सम्मान किया गया।
सभी पत्रकारों को आगामी आयोजन के आमंत्रण पत्र एवं आलेख सामग्री भी वितरित की गई। समारोह में अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री डॉ. अखिल बसल (जयपुर), मनोज सोगानी, डॉ. राजीव प्रचडिया, शैलेश कापडिया सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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इस भव्य सम्मेलन की संकल्पना प्रचार-प्रसार समिति के संयोजक पारसजी लोहाडे द्वारा रखी गई। कार्यक्रम का संचालन विनोद जी पाटणी ने किया और अंत में डॉ.अल्पना जैन (मालेगांव) ने आभार व्यक्त किया। इस सफल आयोजन में णमोकार तीर्थ अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक समिति का विशेष योगदान रहा।






