नासिक मनपा चुनाव: फर्स्ट टाइम वोटर्स में दिखा जबरदस्त उत्साह; मतदाता सूची में बढ़ी भागीदारी
First Time Voters: नासिक में महानगरपालिका चुनाव को लेकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं में उत्साह है। जागरूकता रैलियों और सोशल मीडिया के चलते बड़ी संख्या में नए मतदाता जुड़े हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया AI )
Municipal Election Youth Participation: नासिक शहर में आने वाले दिनों में होने वाले महानगरपालिका चुनाव को लेकर पहली बार वोट देने वाले नए मतदाताओं (फर्स्ट टाइम वोटर्स) में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवक-युवतियों ने बड़ी संख्या में मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर लोकतंत्र के महापर्व की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन द्वारा ग्रामीण और शहरी स्तर पर निकाली जा रही रैलियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल से युवाओं में जागरूकता बढ़ी है।
शिक्षा और पारदर्शी प्रशासन की मांग
नए मतदाताओं ने इस बार उम्मीदवारों के सामने विकास से जुड़े ठोस मुद्दे रखे हैं। योगेश खड़के ने अपनी अपेक्षाएं साझा करते हुए कहा कि हमें ऐसा कॉर्पोरेटर चाहिए जो शिक्षा और हॉस्टल के मुद्दों को गंभीरता से ले।
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सरकारी हॉस्टल की प्रवेश प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद छात्रों को न्याय मिल सके। वार्ड स्तर की समस्याओं पर बात करते हुए युवाओं ने साफ़ किया कि वे केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगेः वृषाली जाधवः वार्ड में सड़कों की हालत बेहद खराब है।
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हमें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो सड़क, पानी और सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर तुरंत फैसले ले सके। अंजलि दवंडेः महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। सीसीटीवी कैमरे, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस करने वाले उम्मीदवार को ही वोट दिया जाएगा।
केवल चुनाव के समय दिखने वाले नेतागण पसंद नहीं
युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे केवल चुनाव के समय दिखने वाले नेताओं को पसंद नहीं करेंगे। सर्वेश थापेकर ने कहा कि हमे बातें करने वाला नहीं, बल्कि काम करने वाला और युवाओं को रोजगार व खेल सुविधाएं देने वाला कॉर्पोरेटर चाहिए, वहीं, वैशाली नागरे और कोमल पाटिल का मानना है कि कॉर्पोरेटर को भ्रष्टाचार से मुक्त होना चाहिए और उसे हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए।
चुनाव आयोग चला रहा चुनावी अवेयरनेस प्रोग्राम
चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अवेयरनेस प्रोग्राम का युवाओं पर गहरा असर हुआ है। कॉलेजों में विशेष सत्र और सड़कों पर निकाली गई रैलियों ने नए वोटर्स को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया है। अब देखना यह होगा कि युवाओं की इन उम्मीदों पर कौन सा उम्मीदवार खरा उतरता है।
