नासिक राजनीति में नया ट्विस्ट, बदल सकते हैं समीकरण; मनपा में 37 दिन बाद भी विपक्ष के नेता पर सस्पेंस

Nashik Municipal Corporation Politics: नासिक मनपा में महापौर चुनाव के 37 दिन बाद भी विपक्ष नेता के चयन में देरी। शिवसेना के दोनों गुटों की सक्रियता से इस पद को लेकर नया राजनीतिक समीकरण बनता दिख रहा है
New Twist in Nashik Politics: Equations May Shift; Suspense Over Leader of Opposition in Municipal Corporation Persists Even After 37 Days
( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Opposition Leader Post Delay: नासिक महापौर के चुनाव को 37 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक विपक्ष के नेता का चयन नहीं हो पाया है। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष के नेता पद पर आखिर किसकी नियुक्ति होगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पर्दे के पीछे राजनीतिक हलचलें तेज हैं।

इसी बीच शिवसेना ठाकरे गुट को चेकमेट देने के लिए शिवसेना शिंदे गुट की सक्रियता बढ़ने से इस पद को लेकर नया राजनीतिक ट्विस्ट सामने आया है। महानगरपालिका में सत्ता गठन के समय भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना शिंदे गुट ने मिलकर सत्ता स्थापित की थी।

ऐसे में संख्या बल के आधार पर विपक्ष के नेता का पद शिवसेना ठाकरे गुट को मिलने की संभावना लगभग तय मानी जा रही थी। हालांकि, अब इस समीकरण में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।

शिवसेना शिंदे गुट ने अलग पार्टी के रूप में पंजीकरण कराया है और महासभा में भी कई मुद्दों पर स्वतंत्र भूमिका निभाई है। इसी कारण इस पद पर शिंदे गुट द्वारा दावा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

भाजपा के हैं महापौर और उप महापौर

महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के चुनाव निर्विरोध होने के कारण शिवसेना शिंदे गुट को मतदान करने की स्थिति नहीं आई। महापौर पद पर भाजपा की हिमगौरी आडके और उपमहापौर पद पर विलास शिंदे निर्विरोध चुने गए।

स्थायी समिति में भी संख्या बल के आधार पर सदस्यों का चयन हुआ और भाजपा के मच्छिंद्र सानप सभापति बने। इस पूरी प्रक्रिया में सत्ता में

शामिल होने के बावजूद शिवसेना शिंदे गुट ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने का प्रयास किया।

महासभा की बैठकों में भी शिवसेना शिंदे गुट ने कई मुद्दों पर स्वतंत्र और स्पष्ट रुख अपनाया है। ऐसे में सत्ता में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान कायम रखते हुए विपक्ष के नेता पद पर दावा करने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है।

संख्या बल की स्थिति

महानगरपालिका में कुल 122 नगरसेवक हैं। इनमें भाजपा के 72, शिवसेना शिंदे गुट के 26। शिवसेना ठाकरे गुट के 15, राष्ट्रवादी कांग्रेस के 4, कांग्रेस के 3, मनसे और एक अपक्ष नगरसेवक शामिल हैं।

मनसे के समर्थन से शिवसेना शिंदे गुट की संख्या 27 हो गई है, जबकि एक अपक्ष के समर्थन से राष्ट्रवादी की संख्या 5 तक पहुंच गई है। दूसरी ओर विपक्षी पंक्ति में ठाकरे गुट और कांग्रेस मिलाकर कुल 18 नगरसेवक हैं।

असमंजस की स्थिति बरकरार

इस पृष्ठभूमि में विपक्ष के नेता पद के लिए आखिर कौन पात्र होगा, इसको लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा चल रही है। महानगरपालिका प्रशासन द्वारा नियमावली और दलों की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है।

संभावना है कि आगामी महासभा में इस मुद्दे पर स्पष्टता आ सकती है। तब तक विपक्ष के नेता पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

हम एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े थे। उसके बाद सभी चुनाव निर्विरोध हो गए। हमारी अलग पंजीकरण है। इसलिए विपक्ष के नेता पद पर हमारा दावा हम प्रस्तुत करेंगे, हालांकि, इस संबंध में वरिष्ठ नेताओं के स्तर पर चर्चा जारी है। ऐसा शिवसेना शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता ने बताया।

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