बीएमसी वार्ड कमेटी चुनाव: उद्धव ठाकरे के साथ हुआ खेला, पार्षदों की एक गलती ने भाजपा की झोली में डाली सत्ता

BMC Ward Committee Election: बीएमसी प्रभाग समिति चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट के दो पार्षदों की गलती से भाजपा ने जीत दर्ज की। 17 में से 11 समितियों पर महायुति का कब्जा हो गया है।
Uddhav Thackeray Shiv Sena Defeat Mumbai
Uddhav Thackeray Shiv Sena Defeat Mumbai (फोटो क्रेडिट-X)
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Uddhav Thackeray Shiv Sena Defeat Mumbai: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के प्रभाग समिति चुनावों में सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। 25 वर्षों तक बीएमसी पर राज करने वाली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को अपनी ही एक 'बड़ी गलती' के कारण सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की महायुति ने 118 सीटों के साथ बीएमसी पर अपना परचम लहराया है। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा 17 प्रभाग समितियों के अध्यक्ष पद के चुनावों की रही, जहां कांटे की टक्कर की उम्मीद थी, लेकिन अंत में पासा पलट गया।

सोमवार को हुए चुनाव में 'एस' (S) और 'टी' (T) प्रभाग समितियों के नतीजे सबसे चौंकाने वाले रहे। यहां महायुति और उद्धव ठाकरे गुट के पास 10-10 सदस्यों का समान संख्याबल था। कायदे से मुकाबला बराबरी पर छूटने के बाद 'लॉटरी' (ईश्वरी चिट्ठी) के जरिए अध्यक्ष का फैसला होना था, लेकिन ऐन वक्त पर उद्धव गुट के दो अनुभवी पार्षदों की एक तकनीकी चूक ने भाजपा की जीत का रास्ता साफ कर दिया। इस हार के साथ ही उद्धव ठाकरे का अपने पुराने गढ़ पर नियंत्रण पाने का सपना फिलहाल टूट गया है।

पार्षदों की एक गलती और अध्यक्ष पद से हाथ

'एस' और 'टी' प्रभाग समिति के चुनाव में उद्धव गुट के दो वरिष्ठ पार्षदों, सुरेश शिंदे और दीपमाला बढ़े की एक गलती पार्टी पर भारी पड़ गई। मतदान के दौरान इन दोनों पार्षदों ने अनजाने में भाजपा उम्मीदवार साक्षी दलवी के कॉलम में हस्ताक्षर कर दिए। चुनाव अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए इन दोनों मतों को 'अवैध' घोषित कर दिया। इसके चलते जहां मुकाबला 10-10 की बराबरी पर होना था, वहां उद्धव गुट पिछड़ गया और भाजपा ने आसानी से इन समितियों पर कब्जा कर लिया। बीएमसी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इतने अनुभवी पार्षदों से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

महायुति का दबदबा और विपक्ष की स्थिति

मुंबई महानगरपालिका की कुल 17 प्रभाग समितियों में से 11 पर भाजपा और शिंदे गुट की महायुति ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है। सोमवार को हुए अंतिम पांच समितियों के चुनाव में भाजपा ने तीन और समितियां अपने नाम कीं। शेष 6 समितियों की बात करें तो कांग्रेस के खाते में 2, उद्धव ठाकरे गुट के पास केवल 1, मनसे (MNS) को 1 और एमआईएम (MIM) को 1 समिति मिली है। महायुति की इस जीत ने मुंबई महानगरपालिका के आगामी कामकाज में उनकी पकड़ को और मजबूत कर दिया है, जिससे विकास कार्यों की कमान अब पूरी तरह सत्तापक्ष के हाथ में आ गई है।

महापौर और उपमहापौर की देखरेख में मतदान

इन चुनावों को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए महापौर रितु तावड़े और उपमहापौर संजय घाड़ी ने पीठासीन अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महापौर ने 'एल' और 'एन' प्रभाग समितियों के चुनावों की निगरानी की, जबकि उपमहापौर ने 'एम पूर्व', 'एम पश्चिम', 'एस' और 'टी' प्रभागों की चुनावी प्रक्रिया को संभाला। उद्धव गुट के भीतर अब इस हार को लेकर आत्ममंथन शुरू हो गया है, क्योंकि हाथ में आया मौका पार्षदों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह हार भविष्य के बीएमसी समीकरणों में उद्धव गुट के मनोबल को प्रभावित कर सकती है।

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