
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद अब सबकी निगाहें शहर के ‘प्रथम नागरिक’ यानी महापौर पद पर टिकी हैं। आगामी 22 जनवरी को सुबह 11 बजे मुंबई स्थित मंत्रालय में महापौर पद के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि नासिक की कमान किस वर्ग के हाथ में होगी।
भाजपा के पास 122 में से 72 सीटों का स्पष्ट बहुमत होने के कारण महापौर का भगवा खेमे से होना तय है, लेकिन औपचारिक पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया फरवरी माह तक पूरी हो पाएगी।
इस बार की चुनाव प्रक्रिया में एक अनूठा बदलाव देखने को मिला है। नासिक के इतिहास में पहली बार पार्षदों के चुनाव के बाद महापौर पद का आरक्षण घोषित किया जा रहा है।
आरक्षण स्पष्ट न होने के कारण नतीजों के बाद राजनीतिक गहमागहमी थोड़ी कम रही और निर्वाचित पार्षद अपने क्षेत्रों में मतदाताओं का आभार मानने में व्यस्त रहे। माना जा रहा है कि खुले वर्ग से शुरुआत करते हुए रोटेशन पद्धति के आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा।
नासिक मनपा के चुनावी आंकड़ों ने एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है। राज्य में एक साथ सरकार चलाने वाली महायुति के घटक दल नासिक में आमने-सामने होंगे।
भाजपा को मिले पूर्ण बहुमत के कारण शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) को विपक्ष की भूमिका निभानी पड़ेगी। इनके साथ ही शिवसेना (ठाकरे गुट), काग्रेस और मनसे भी विपक्षी बेंचों पर नजर आएंगे।
22 जनवरी को आरक्षण घोषित होने के बाद प्रशासन निम्नलिखित कदम उठाएगा, सबसे पहले भाजपा अपने दलनेता (गटनेता) का आधिकारिक चयन करेगी।
यह भी पढ़ें:-मनरेगा अब ‘वी.बी. जी राम जी’ नाम से हुई लागू, ग्रामीण विकास को नई दिशा; मनरेगा को मिला नया स्वरूप
इसके बाद सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों को महासभा के आयोजन की नोटिस भेजी जाएगी। नामांकन और छंटनी के बाद विशेष सभा में महापौर का चुनाव होगा, जिसके बाद फरवरी की शुरुआत में पदभार ग्रहण किया जाएगा।
नगर विकास विभाग द्वारा नासिक सहित राज्य की कुल 29 महानगरपालिकाओं के लिए एक साथ लॉटरी निकाली जाएगी, नासिक में कौन सा वर्ग आरक्षित होगा, इसे लेकर भाजपा के भीतर कई दावेदार अभी से दिल्ली और मुंबई के चक्कर लगा रहे हैं। बहुमत का आंकड़ा पास होने के कारण भाजपा के लिए यह चुनाव केवल एक औपचारिकता मात्र रह गया है।






