नासिक मनपा ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik General Body Meeting: नासिक महापौर और स्थायी समिति सदस्यों के चुनाव के बाद आयोजित शुक्रवार की मासिक आमसभा काफी हंगामेदार रही। चार साल का प्रशासनिक शासन समाप्त होने के बाद आयोजित यह पहली नियमित बैठक थी, जिसमें सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर प्रशासन से सीधे जवाब-तलब किया। प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि का सीधा सामना देखने को मिला और पिछले चार वर्षों के कामकाज की तीखी आलोचना की गई।
महापौर का आक्रामक रुख और कड़े फैसले: महापौर हिमगौरी आहेर-आडके केवल स्वच्छता निरीक्षकों को ही रहेगा। साथ ही, अतिरिक्त आयुक्त द्वारा की गई कुछ ठेका नियुक्तियों को रद्द करने के निर्देश दिए और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
सिडको क्षेत्र के लंबित मुद्दों और इसे ‘अमृत’ योजना से बाहर रखने पर सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षद एक साथ खड़े हो गए। सभी ने सिडको के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। महापौर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी अव्यवस्था किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अध्यक्षताः महापौर हिमगौरी आहेर-आडके बड़ी घोषणा पेलिकन पार्क में स्मारक निर्माण को मंजूरी, प्रशासनिक बदलावः जुर्माना वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता के निर्देश। आंदोलन ठाकरे गुट के पार्षदों का बैनर पहनकर विरोध प्रदर्शन।
बैठक में भाजपा पार्षद सुधाकर बडगुजर और निर्दलीय पार्षद मुकेश शहाणे के बीच बोलने के क्रम को लेकर तीखी बहस हुई। दूसरी ओर, पेलिकन पार्क में स्वर्गीय उपमुख्यमंत्री का स्मारक बनाने के प्रस्ताव को सदन ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ पार्षद चंद्रकांत खोडे ने भूमिपुत्रों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
यह भी पढ़ें:-नासिक: गोपनीय रखने की कोशिश नाकाम, 62 एकड़ जमीन की फाइलें गायब, राजस्व विभाग में हड़कंप
शिवसेना ठाकरे गुट के पार्षद योगेश भोर और रुचिरा सालवे डिजिटल बोर्ड के बैनर पहनकर सदन में पहुंचे, जो चर्चा का केंद्र रहा। उन्होंने मांग की कि नासिक के विकास कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग को एनओसी देना बंद किया जाए और महापालिका खुद इन कार्यों को संभाले।