Administrator appointment (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Gram Panchayat: नासिक जिले की ग्रामीण राजनीति में इस महीने के अंत तक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने जा रहा है। जिले की 663 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जबकि 400 पंचायतों पर पिछले एक-दो साल से प्रशासक नियुक्त हैं। परिणामस्वरूप, मार्च महीने से जिले की एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यभार सरकारी प्रशासकों के हाथों में होगा।
सरपंच परिषद ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया है कि यदि एक प्रशासक को 20 से 25 गांवों की जिम्मेदारी दी जाएगी, तो ग्रामीण विकास का पहिया कैसे चलेगा। परिषद ने मांग की है कि या तो तत्काल चुनाव कराए जाएं या चुनाव होने तक वर्तमान सदस्यों को ही प्रशासक के अधिकार दिए जाएं।
इस मांग के समर्थन में शुक्रवार, 20 फरवरी को ग्राम पंचायतों का कामकाज बंद रखने की चेतावनी दी गई।न्यायालय की सुनवाई के दौरान मंगलवार, 17 फरवरी को निर्देश दिया गया कि कार्यकाल समाप्त पंचायतों पर प्रशासक नियुक्त किए जाएं और जल्द चुनाव के संदर्भ में रिपोर्ट पेश की जाए।
सरपंच परिषद का तर्क है कि राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांवों में विकास कार्य जारी हैं। मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान जैसे अभियानों में जनभागीदारी अनिवार्य है, जो जनप्रतिनिधियों के बिना संभव नहीं है। प्रशासकों की नियुक्ति से इन योजनाओं की गति धीमी होने और विकास कार्य ठप होने का डर बना हुआ है।
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नासिक (25), इगतपुरी (1), त्र्यंबकेश्वर (3), दिंडोरी (60), कलवण (28), बागलाण (40), देवला (10), चांदवड (52), मालेगांव (99), नांदगांव (59), येवला (69), निफाड (64) और सिन्नर (100)।
सरपंच परिषद जिलाध्यक्ष शिवा सुरासे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री और संबंधित सचिवों को तत्काल बैठक कर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। एक प्रशासक पर 20-25 गांवों का बोझ डालना विकास को रोकने जैसा है। शासन को चाहिए कि वर्तमान कार्यकारिणी को ही प्रशासक नियुक्त करे और जल्द से जल्द चुनाव संपन्न कराए।