प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Sustainable Agriculture: नासिक रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने हमारी धरती माता को बंजर बना दिया है। यदि हमें ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को सच करना है और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ रखना है, तो प्राकृतिक खेती को अपनाना आज के समय की यह विचार सबसे बड़ी अनिवार्यता है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दिंडोरी तालुका के मोहाडी स्थित सह्याद्री फार्म्स में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती संवाद’ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
कार्यक्रम में स्वयं को एक साधारण किसान के रूप में प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हरित क्रांति के समय प्रति हेक्टेयर मात्र 13 किलो यूरिया के उपयोग का सुझाव दिया गया था, लेकिन आज यह मात्रा कई गुना बढ़ चुकी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मिट्टी के भीतर मौजूद सूक्ष्म जीव अब खत्म हो रहे हैं, जिससे जमीन की जल धारण क्षमता घट गई है, ग्लोबल वार्मिंग के कारण कहीं सूखा तो कहीं अतिवृष्टि जैसे संकट इसी असंतुलन का परिणाम हैं।
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि आज हमारे भोजन में उर्वरकों और कीटनाशकों के अंश पाए जा रहे हैं, जो मानवीय रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर रहे हैं। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती और गो-पालन ही इन समस्याओं का एकमात्र स्थायी समाधान है। उन्होंने कृषि विभाग और सह्याद्री फाम्र्म्स से स्थानीय किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
समारोह में मंडल आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम ने जानकारी दी कि नासिक जिला कृषि के क्षेत्र में देश का अग्रणी जिला है। यहां के प्याज, अंगूर और वाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग मिला हुआ है।
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उन्होंने विश्वास जताया कि राज्यपाल के मार्गदर्शन से जिले के किसान अब रासायनिक खेती छोड प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएंगे।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल, सांसद भास्कर भगरे, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल, सह्याद्री फार्म्स के एमडी विलास शिंदे सहित जिला प्रशासन और कृषि विभाग के आला अधिकारी उपस्थित थे। राज्यपाल ने किसानों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन कर उनके उत्पादों की सराहना भी की।