सुनेत्रा पवार व रोहित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rohit Pawar On Sunetra Pawar: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। शरद पवार गुट के कद्दावर नेता और विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया है कि पार्टी के सभी विधायक सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पक्ष में नहीं हैं। इस दावे ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।
रोहित पवार के अनुसार, अजित पवार के बाद पार्टी के अधिकांश नेताओं ने सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का समर्थन किया है, लेकिन यह समर्थन सर्वसम्मत नहीं है। रोहित पवार ने खुलासा किया कि कुल 35 विधायकों और 32 पदाधिकारियों ने सुनेत्रा पवार के नाम के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन लोगों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, यह उनकी अपनी पार्टी के भीतर एक गंभीर चर्चा का विषय है। उन्होंने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें उन लोगों की सूची देखनी चाहिए जिन्होंने साइन नहीं किए हैं और उनसे इसका कारण पूछना चाहिए।
रोहित पवार ने एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि अजित दादा पवार के जीवित रहते हुए विलय को लेकर चर्चा चल रही थी क्योंकि वे दोनों परिवारों और पार्टियों को एक साथ लाना चाहते थे। रोहित पवार के मुताबिक, “दादा एनसीपी के नेतृत्व में कई बदलाव चाहते थे और उनकी इच्छा थी कि कोई युवा नेता प्रदेश अध्यक्ष बने।” उन्होंने खुलासा किया कि इस पद के लिए अमोल कोल्हे का नाम प्रस्तावित किया गया था। हालांकि, अजित दादा के निधन के बाद स्थितियां बदल गई हैं।
वर्तमान में सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि वित्त विभाग को छोड़कर बाकी सभी महत्वपूर्ण विभाग उन्हें सौंप दिए गए हैं। पार्टी के भीतर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन 3 विधायकों के विरोध की खबरों ने इस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता प्रफुल पटेल ने ऐलान किया है कि सुनेत्रा पवार ही NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी। जिसकी घोषणा 26 फरवरी को की जा सकती है।
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रोहित पवार का कहना है कि अजित दादा की भावनात्मक और राजनीतिक इच्छा दोनों गुटों को साथ देखने की थी। लेकिन अब उनके जाने के बाद नेतृत्व का संकट गहराता दिख रहा है। जहां एक तरफ सुनेत्रा पवार को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतोष के सुरों ने आगामी दिनों में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की ओर इशारा किया है।