नाशिक की 11 में से 5 नगर परिषदों ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार की, SC की टिप्पणी के बाद टेंशन
Nashik News: नाशिक जिले की 5 नगर परिषदों ने 50% आरक्षण सीमा पार की, जिससे चुनावों पर संकट है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद चुनाव परिणाम निर्भर करेंगे, अगली सुनवाई शुक्रवार को।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nashik Local Body Elections News: जिले की 11 में से 5 नगर परिषदों ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार कर ली है. इसके चलते इन नगर परिषदों के चुनाव पर संकट मंडरा रहा है. इन पांच नगर परिषदों में मनमाड़, पिंपलगांव बसवंत, इगतपुरी, ओझर और त्र्यंबकेश्वर का समावेश है. 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा लागू करनी है या नहीं, इस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अब इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी. इसमें 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा पार करने वाली 57 नगर परिषदों के चुनाव परिणाम सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर निर्भर करेंगे.
उसके बाद चुनाव की स्थिति स्पष्ट होगी. 19 नवंबर को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि 50 प्रतिशत की सीमा पार हुई तो चुनाव स्थगित करने पड़ सकते हैं. इसलिए इन पांच नगर परिषदों के उम्मीदवारों की नजर अब शुक्रवार की सुनवाई पर टिकी है. राज्य में 2 दिसंबर को 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान होने वाला है.
नाशिक जिले में 11 नगर परिषदों के चुनाव हैं, जिनमें से इन पांच नगर परिषदों ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पार की है. इनमें त्र्यंबकेश्वर 65 प्रतिशत, पिंपळगांव बसवंत 64 प्रतिशत, इगतपुरी 61.90 प्रतिशत, मनमाड़ 60.61 प्रतिशत और ओझर 55.56 प्रतिशत आरक्षण पर हैं.
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महानगरपालिका सुरक्षित, लेकिन जिला परिषद मुश्किल में
नाशिक महानगरपालिका का आरक्षण घोषित हो चुका है, जो 48.36 प्रतिशत है. लेकिन नाशिक जिला परिषद का आरक्षण 52.70 प्रतिशत है. इसलिए महानगरपालिका के चुनाव सुरक्षित माने जा रहे हैं, जबकि जिला परिषद के चुनाव मुश्किल में पड़ सकते हैं. ये दोनों चुनाव अभी घोषित नहीं हुए हैं. इसलिए जिला परिषद अपने आरक्षण में बदलाव कर सकती है, लेकिन इसमें कितना समय लगेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है.
