Nashik News: मालेगांव के सात लघु सिंचाई प्रकल्प लबालब, अप्रैल तक में नहीं होगी पानी की किल्लत
Malegaon Water Crisis: मालेगांव तहसील में औसत से अधिक वर्षा के कारण अप्रैल तक पानी की किल्लत नहीं होगी, प्रशासन ने 83 गांवों और 52 बस्तियों के लिए विस्तृत जल संकट निवारण एक्शन प्लान तैयार किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
water scarcity action pla (सोर्सः सोशल मीडिया)
Malegaon Water Supply Plan: इस वर्ष तहसील में औसत से अधिक वर्षा होने के कारण आगामी अप्रैल माह तक पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता रहने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। पंचायत समिति के जल किल्लत विभाग द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे में 43 गांवों और 22 बस्तियों (वाडियों) के लिए विशेष नियोजन किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, नौ विभिन्न उपायों के माध्यम से पानी की कमी को दूर किया जाएगा। जल नियोजन को तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण (अक्टूबर से दिसंबर 2025) पूरी तरह समस्या-मुक्त रहा। वर्तमान में दूसरा चरण (जनवरी से मार्च 2026) जारी है, जिसमें 21 गांवों और 19 बस्तियों को शामिल किया गया है। अब तक तहसील कार्यालय को पानी की कमी संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
प्रशासन ने तैयार किया जल संकट निवारण एक्शन प्लान
अंतिम चरण (अप्रैल से जून) में 62 गांवों और 33 बस्तियों में जल किल्लत की संभावना जताई गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुल 83 गांवों और 52 बस्तियों के लिए जलापूर्ति की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य के मंत्री दादा भुसे के निर्देश पर उपजिलाधिकारी नितिन सदगीर, तहसीलदार विशाल सोनवणे और खंड विकास अधिकारी मच्छिंद्र साबले ने यह रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है।
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बारिश के आंकड़े और जलस्तर
तहसील में मानसून के दौरान अच्छी वर्षा दर्ज की गई। जून में 90.5 मिमी, जुलाई में 93.90 मिमी, अगस्त में 196.70 मिमी और सितंबर में सर्वाधिक 206.3 मिमी वर्षा हुई। इस जोरदार बारिश के कारण सूखे पड़े बांध, नदी-नाले और क्षेत्र के सात लघु सिंचाई प्रकल्प पूरी तरह भर चुके हैं। यह जल संचय अप्रैल के अंत तक सुचारु जलापूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
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टैंकर मुक्त हुआ तहसील
पिछले वर्ष अप्रैल से ही तहसील में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही थी। जून में आंशिक वर्षा के बाद झाड़ी और मांजरे जैसे गांवों में टैंकर बंद कर दिए गए थे, लेकिन घोडेगांव, जलगांव, विराणे और ज्वार्डी बुद्रुक सहित 26 बस्तियां सितंबर तक टैंकरों पर निर्भर थीं। अगस्त में औसत से 88.8 मिमी अधिक वर्षा होने के कारण सितंबर की शुरुआत में ही तहसील पूरी तरह ‘टैंकर मुक्त’ हो गई थी।
