Paddy Procurement Limit Scam Bhandara: भंडारा जिले में केंद्र सरकार की आधारभूत मूल्य धान खरीदी योजना प्रशासनिक अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। महाराष्ट्र राज्य किसान सभा के जिलाध्यक्ष और राज्य कौंसिल सदस्य माधवराव बांते ने गंभीर आरोप लगाया है कि धान खरीदी के लक्ष्यों (लिमिट) के नाम पर किसानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा रही है। उन्होंने पणन महासंघ के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब शासन का उद्देश्य किसानों को व्यापारियों के शोषण से बचाना है, तो विभाग स्वयं शोषण का जरिया क्यों बन रहा है?
माधवराव बांते ने बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री ने कई बार सार्वजनिक मंचों से घोषणा की है कि जब तक किसानों के पास धान का आखिरी दाना मौजूद है, तब तक खरीदी जारी रहेगी। भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से भी खरीदी के लिए कोई सीमित लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। वर्तमान में भंडारा जिले की उत्पादकता 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तय है, लेकिन इसके बावजूद लगभग 50 प्रतिशत किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा जा सका है। बांते का प्रश्न है कि जब ऊपर से कोई पाबंदी नहीं है, तो जिला स्तर पर पणन महासंघ के अधिकारी केंद्रों पर लिमिट का दबाव क्यों बना रहे हैं?
किसान सभा का आरोप है कि यह ‘लिमिट’ व्यवस्था केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई है। आरोप के अनुसार, पणन महासंघ के अधिकारी उन केंद्रों को अधिक लक्ष्य (Target) आवंटित कर रहे हैं, जो अवैध रूप से धन या रिश्वत उपलब्ध कराते हैं। वहीं, जो संस्थाएं भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं बनतीं, उन्हें बहुत कम लक्ष्य दिया जाता है, जिससे हजारों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल में विभाग के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के माध्यम से धन का लेन-देन हो रहा है, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
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इस गंभीर स्थिति को देखते हुए माधवराव बांते ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल और महाराष्ट्र राज्य पणन महासंघ के प्रधान व्यवस्थापक को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि लक्ष्य की इस भ्रामक और भ्रष्ट प्रणाली को तुरंत समाप्त कर पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए। किसानों और केंद्र संचालकों का कहना है कि यदि यह मनमानी नहीं रुकी, तो मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।