नासिक में देशी गायों के संरक्षण पर सवाल, गौशालाओं को 1500 अनुदान बढ़ाने की मांग तेज

Nashik Ladki Gaay Yojana: नासिक के गोपालकों ने 'लाडकी गाय योजना' के तहत देशी गायों के लिए 1500 के मासिक अनुदान को बढ़ाने की मांग की है, ताकि संकरित गायों की तुलना में इनका संवर्धन हो सके।
Cattle rearers in Nashik have demanded an increase in the ₹1500 monthly subsidy under Ladki Gaay Yojana to save indigenous cows facing threat from crossbreeds.
गोपालकों (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Gau Seva Aayog Ladki Gaay Yojana: गौशालाओं में देशी गायों के पालन-पोषण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने लाडकी गाय योजना की शुरुआत की है। महाराष्ट्र गौ सेवा आयोग के माध्यम से पंजीकृत गौशालाओं की गायों को प्रति माह 1500 का अनुदान दिया जाता है, लेकिन संकरित (क्रॉस ब्रीड) गायों के लिए सरकार द्वारा 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने की तुलना में यह राशि कम है। इसलिए गोपालकों ने देशी गायों के संरक्षण के लिए इस अनुदान राशि को बढ़ाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में 20 मई का दिन राज्य स्तरीय पशुपालन दिवस के रूप में मनाया जाता है। नवीनतम पशुगणना के आंकड़ों के अनुसार, नासिक जिले में गाय वर्ग के गोवंश की कुल संख्या 8 लाख 95 हजार है, जबकि भैंसों की संख्या 2 लाख 21 हजार दर्ज की गई है। जिले में दूध उत्पादन के लिए मुख्य रूप से संकरित गायों, देशी गायों और भैंसों का उपयोग होता है, जिसमें संकरित गायों की संख्या अधिक होने के कारण दूध की अधिकांश मांग इन्हीं के माध्यम से पूरी की जाती है।

गौर, साहिवाल और खिल्लार नस्ल की गाय

नासिक जिले में मुख्य रूप से गौर, साहिवाल और खिल्लार नस्ल की देशी गाय पाई जाती है। गिर नस्ल की गाय जहां साल भर दूध दे सकती है, वहीं अन्य देशी गायें केवल तीन से चार महीने ही दूध देती है और उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता भी कम होती है। इसके अलावा, बछड़े की मृत्यु होने पर देशी गायों का दूध तुरंत सूख जाता है। यही कारण है कि व्यावसायिक रूप से देशी गायों को पालने का चलन दिनों-दिन कम हो रहा है। देशी गोवंश को बढ़ावा देने के लिए ही राज्य सरकार ने पंजीकृत गौशालाओं के माध्यम से संवर्धन करने पर प्रति गाय 1500 मासिक अनुदान देने का निर्णय लिया था।

17 संस्थाओं ने कराया पंजीकरण

नासिक जिले में अब तक 17 संस्थाओं ने इसके तहत पंजीकरण कराया है, जहां लगभग 400 गायों का पालन-पोषण किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशी गायों की संख्या बढ़ानी है, तो आम किसानों को भी प्रोत्साहित करना होगा और उनके पास मौजूद देशी गायों के लिए भी अनुदान देना होगा। इसके विपरीत, सरकार द्वारा संकरित गायों को बढ़ावा देने के लिए 50 से 75 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दिए जाने के कारण किसानों का रुझान उनकी तरफ अधिक है, जिससे देशी गायों की संख्या लगातार घट रही है।

सरकार ने अनुदान की शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं। किसानों के लिए दूध न देने वाले (अनुत्पादक) पशुओं की देखभाल करना आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पाता है, और ऐसे पशुओं पर उन्हें अनुदान भी नहीं मिलता। यदि सरकार इस व्यावहारिक पहलू पर विचार कर शतों में ढील दे, तो देशी गायों का सही मायने में संवर्धन हो सकेगा। वर्तमान में पांजरपोल के विभिन्न प्रकल्पों में करीब 1700 गाये मौजूद हैं।

डॉ. नीलेश शेलार, गोपालक

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