होम लोन लेते वक्त सबसे बड़ी गलती-ईएमआई कितनी हो? जानिए सही फॉर्मूला
Nashik Home Loan EMI: होम लोन की ईएमआई तय करते वक्त सैलरी का सही प्रतिशत न जानना भविष्य में बजट बिगाड़ सकता है। सही प्लानिंग से आप घर का सपना बिना दबाव पूरा कर सकते हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Salary Percentage: नासिक हर कोई अपना घर खरीदने का सपना देखता है। घरों की बढ़ती पॉपुलैरिटी की वजह से आज के समय में होम लोन लेना जरूरी हो गया है। हालांकि, लोन की किस्त तय करते समय अक्सर एक बड़ी गलती हो जाती है।
इसका असर आगे चलकर परिवार के बजट पर पड़ता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपकी ईएमआई आपकी सैलरी का कितना परसेंट होनी चाहिए, क्योंकि जब आप किस्त चुकाते हैं, तो आपकी सैलरी या कुल इनकम का एक बड़ा हिस्सा डूब जाता है।
जेब पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी
घर खरीदने की तैयारी करते समय आपको यह फाइनेंशियल मैद्र तैयार कर लेना चाहिए कि आपकी सैलरी कितनी है और आप किस्तों में कितने, हजार चुका सकते है। घर खरीदते समय यह सोचना जरूरी है कि आपकी जेब कितना खर्च कर सकती है, न कि सिर्फ बैंक से मिलने वाले लोन के बारे में।
सम्बंधित ख़बरें
यवतमाल में किसान की सतर्कता से खुला मंडी घोटाला! पुसद मंडी में वजन कांटे पर सवाल, 2 तौल में 10 क्विंटल का फर्क
परीक्षा से 8 दिन पहले ही लीक हो गया था NEET का पेपर; सीबीआई के हाथ लगे मनीषा वाघमारे के गुप्त दस्तावेज
मुंबई में बीएमसी ने चिन्हित किए 147 Garbage Vulnerable Points, कचरा मुक्त अभियान तेज
गोंदिया में सरकारी खरीदी केंद्रों पर धान बिक्री बढ़ी, करोड़ों का भुगतान; हजारों किसानों को राहत
सोचना चाहिए, अपने होम लोन की किस्त फिक्स रखने से आप बिना किसी मेटल स्ट्रेस के घर खरीदने का अपना सपना पूरा कर पाएंगे। नहीं तो, बहुत से लोगों को लंबे इंतजार के बाद घर खरीदने का पछतावा हो सकता है।
क्या होता है ’40 परसेंट’ का गोल्डन नियम
इकॉनमिस्ट के मुताबिक, आपके होम लोन की किस्त आपकी महीने की नौलरी के 35 से 40 परसेंट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसे 40 परसेंट रूल’ कहते है।
यह भी पढ़ें:-नासिक अंगूर बाजार में रौनक, काले अंगूर 200 रुपये किलो; मौसम बदला, फलों की मांग बढ़ी
उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी 80,000 रुपये है, तो अपनी किस्त 32,000 रुपये के आसपास रखना सेफ है। इससे, आप बचे हुए 48 से 50,000 रुपये का इस्तेमाल घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इन्वेस्टमेंट के लिए कर सकते हैं।
