नागपुर में साल भर बाद भी ठंडे बस्ते में 10 करोड़ का ‘युद्ध स्मारक’ प्रोजेक्ट, सेना से अंतिम मंजूरी का इंतजार
Nagpur War Memorial: नागपुर के टेकड़ी रोड पर 10 करोड़ की लागत से बनने वाला भव्य युद्ध स्मारक प्रशासनिक मंजूरी के बाद भी अटका हुआ है। सेना से अंतिम भूमि हस्तांतरण की अनुमति मिलना अभी बाकी है।
- Written By: रूपम सिंह
भव्य युद्ध स्मारक (सोर्सः सोशल मीडिया)
NMC Amrit Mahotsav Architect Saumya Pandey: आजादी के बाद लड़े गए देश के 4 प्रमुख युद्धों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शूरवीरों के पराक्रम और शौर्यगाथा को समर्पित युद्ध स्मारक (वॉर मेमोरियल) टेकड़ी रोड पर बनाने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। हालांकि एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक इसका भूमिपूजन तक नहीं हो सका है।
इस संबंध में जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि स्मारक के लिए आवश्यक भूमि की अंतिम मंजूरी का प्रस्ताव सेना के पास लंबित पड़ा है। युद्ध स्मारक के जरिए 1962 के चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाक युद्ध, 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और 1999 के कारगिल युद्ध के वीर शहीदों के पराक्रम की गाथा आम नागरिकों तक पहुंचाई जानी थी। विशेष रूप से युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से नागपुर महानगरपालिका के अमृत महोत्सव के अवसर पर इस परियोजना को प्रस्तावित किया गया था। 29,000 वर्गफीट का होगा स्मारक इस भव्य स्मारक के निर्माण के लिए – ‘नागपुर <@>2025’ नामक मंच ने महानगरपालिका को प्रस्ताव सौंपा था।
इस मंच से जुड़ीं आर्किटेक्ट सौम्या पांडे ने स्मारक का पूरा डिजाइन भी तैयार किया है। इसके बाद सेना के संरक्षण विभाग से पत्राचार किया गया जिसके बाद संबंधित विभाग ने इस अनूठे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 29,000 वर्गफीट जमीन उपलब्ध कराने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। हालांकि चर्चा है कि सेना के विभाग में हुए नेतृत्व परिवर्तन (अधिकारियों के तबादले) के बाद आगे की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई।
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10 करोड़ के फंड का प्रावधान
नागपुर शहर के युवाओं की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए तत्कालीन मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी ने भी इस परियोजना पर सकारात्मक रुख अपनाया था। परियोजना का प्रस्ताव और 10 करोड़ रुपये के फंड का प्रावधान महानगरपालिका सदन में पेश किया गया जिसे प्रशासनिक मंजूरी मिल गई।
इसी बैठक में मनपा और सेना के बीच भूमि हस्तांतरण समझौते के साथ-साथ मनपा और ‘नागपुर backslash( a > 2025’ मंच के बीच होने वाले समझौते को भी हरी झंडी दी लेकिन अब मनपा गलियारों में चर्चा है कि सेना की ओर से अगले स्तर पर कोई प्रतिक्रिया (रिस्पांस) न मिलने के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना अटकी हुई है।
