नागपुर: हाईवे पर डीजल की भारी किल्लत, पंप ‘ड्राई’ होने से 140 लीटर ब्लैक में बिक रहा ईंधन; ट्रकर्स में आक्रोश
Nagpur Diesel Shortage: नागपुर को जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे पर डीजल की भारी किल्लत के चलते ईंधन 140 प्रति लीटर तक ब्लैक में बेचा जा रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय चरमरा गया है।
- Written By: रूपम सिंह
डीजल की भारी किल्लत (सौ. सोशल मीडिया )
Nagpur Fuel Black Marketing: ईंधन के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अब नागपुर शहर के बाहरी इलाकों, प्रमुख हाईवे पर डीजल की भारी किल्लत और उसकी आड़ में काले धंधे का एक बड़ा खेल चल रहा है। हाईवे के पेट्रोल पंपों के आसपास डीजल खुलेआम डिब्बों में रखकर ‘ब्लैक’ में 140 रुपए प्रति लीटर बेचा जा रहा है। पंपों पर पर्याप्त डीजल नहीं मिलने से ट्रक चालकों को मजबूरन ब्लैक में डीजल खरीदना पड़ रहा है। ट्रकर्स में इससे रोष बढ़ गया है। उनका कहना है कि शहर से बाहर के पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त डीजल नहीं मिल रहा है, हाईवे के कई पंप ‘ड्राई’ पड़ गए हैं।
नागपुर में टूकर्स के संगठनों ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए नाराजगी जताई है। शहर से बाहर आउटर में ट्रक चालकों को इस तरह की परिस्थिति में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे ट्रांसपोर्टर्स की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही है। उन्हें नुकसान वहन करना पड़ रहा है।
चारों प्रमुख हाईवे के क्षेत्रों में डीजल की भारी किल्लत
ट्रकर्स ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि वर्धा रोड, कामठी रोड, सावनेर रोड और बॉम्बे रोड सहित नागपुर को जोड़ने वाले चारों प्रमुख हाईवे के ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। ट्रकर्स ने बताया कि यहां कई पेट्रोल पंप या तो पूरी तरह से ‘ड्राई’ हो चुके हैं या फिर साठगांठ के तहत ट्रक चालकों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ईंधन नहीं दे रहे हैं। ट्रकर्स ने यहां तक दावा करते हुए कहा कि पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की फुल टंकी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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ट्रक चालकों को 50 से 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी डीजल को डिब्बों में भर-भरकर हाईवे पर 130 से 140 प्रति लीटर की मनमानी कीमत पर बेचा जा रहा है। मजबूरी में फंसे ट्रक चालकों को रास्ते में गाड़ी खड़ी होने के डर से यह महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है।
कालाबाजारी से लॉजिस्टिक्स का पूरा शेड्यूल चरमराया ट्रक चालकों ने बताया कि इस अघोषित स्थिति और कालाबाजारी के कारण लंबी दूरी के लॉजिस्टिक्स का पूरा शेड्यूल चरमरा गया है। ट्रक चालकों ने बताया कि जो गाड़ियां नागपुर से कलकत्ता, मुंबई या दिल्ली के लिए 5-6 दिनों में पहुंचती थीं उन्हें अब जगह-जगह डीजल के लिए भटकते हुए 15 से 20 दिन का समय लग रहा है।
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मासिक किस्त चुकाना पड़ रहा भारी
नागपुर शहर के कुछ ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि एक तरफ जहां 40 से 50 लाख की गाड़ियों पर 1.5 लाख रुपए मासिक की भारी-भरकम किस्त चुकाना भारी पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर पुराने सौदों का हवाला देकर व्यापारी बढ़ा हुआ भाडा देने को बिल्कुल तैयार नहीं है।
ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय देश की रीढ़ की है। यदि प्रशासन ने पंपों पर हो रही इस कालाबाजारी और मनमानी को तुरंत नहीं रोका तो माल की आवाजाही ठप होने से देश भर में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत और हाहाकार मचने की नौबत आ जाएगी।
