नागपुर मेडिकल में नवीनीकरण का असर: गड़चिरोली की आदिवासी महिला भर्ती के लिए 3 दिन तक भटकी
Nagpur Hospital: नागपुर मेडिकल अस्पताल में वार्डों के नवीनीकरण के चलते गरीब मरीजों को भर्ती होने में दिक्कतें आ रही हैं। गड़चिरोली की एक पीड़ित महिला को 3 दिन बाद मानवीय आधार पर भर्ती किया गया।
- Written By: रूपम सिंह
नागपुर मेडिकल (सौ. सोशल मीडिया )
Nagpur Government Medical Hospital: शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में में कई वार्डों का नवीनीकरण कार्य जारी है। इसका सबसे अधिक असर इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि केवल सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है और ऐसे मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अन्य मरीजों को भर्ती करने की बजाय बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) से ही वापस भेज दिया जाता है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि भर्ती करने में जानबूझकर टालमटोल की जा रही है। गड़चिरोली जिले के धानोरा तहसील के दुर्गम गठाणेली-येरकड क्षेत्र की आदिवासी महिला सुनीता मडावी 12 मई को इलाज के लिए मेडिकल पहुंचीं।
उन्हें हड्डी रोग से संबंधित गंभीर समस्या थी और दर्द असहनीय हो रहा था। ओपीडी में सुनीता का प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद कई मेडिकल टेस्ट कराने को कहा लेकिन जांच पूरी होने तक ओपीडी का समय समाप्त हो गया जिसके कारण उन्हें मेडिकल परिसर में ही खुले में रात बितानी पड़ी। अगले दिन वे फिर डॉक्टरों के पास पहुंचीं। उन्हें अतिरिक्त एक्स-रे जांच कराने के लिए कहा गया लेकिन इसके बाद भी उन्हें वार्ड में भर्ती नहीं किया गया।
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3 दिनों तक इंतजार करती रही गड़चिरोली की महिला
परिणामस्वरूप दूसरी रात भी उन्होंने मेडिकल के प्रतीक्षालय के पास बिताई। तीसरे दिन यह मामला मेडिकल के अस्थि रोग विभाग प्रमुख के संज्ञान में लाया गया। तब बताया गया कि संबंधित वार्ड का नवीनीकरण कार्य चल रहा है, इसलिए केवल शल्यक्रिया की आवश्यकता वाले मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है।
इसके बाद समाजसेवा अधीक्षक कार्यालय और अस्थि रोग विभाग प्रमुख ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहल की तथा संबंधित मरीज को तीसरे दिन भर्ती कर उपचार शुरू करने के निर्देश दिए। मेडिकल के जिन विभागों में नवीनीकरण कार्य चल रहा है वहां भी ऐसी ही स्थिति होने का आरोप कुछ मरीजों और उनके परिजनों ने लगाया है।
