‘उड़ान योजना’ में विदर्भ की अनदेखी? नागपुर एयरपोर्ट को नहीं मिल रही उड़ानों की बढ़ोतरी
Vidarbha UDAN Scheme Nagpur: ‘उड़ान योजना’ के तहत अपेक्षित हवाई कनेक्टिविटी नहीं मिलने पर नाराजगी बढ़ रही है। नागपुर एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या नहीं बढ़ने से निवेश के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
उड़ान योजना में विदर्भ को किया गया नजरअंदाज (सौ. सोशल मीडिया )
Vidarbha UDAN Scheme Neglect Nagpur: केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने वाली महत्वाकांक्षी ‘उड़ान योजना’ में विदर्भ क्षेत्र की अनदेखी को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आरोप है कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों की तुलना में विदर्भ को इस योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ‘उड़ान योजना’ का उद्देश्य छोटे शहरों को सस्ती हवाई सेवाओं से जोड़ना है, लेकिन विदर्भ के कई संभावित हवाई अड्डे अब तक योजना के दायरे में नहीं आ सके हैं।
इससे क्षेत्र के आर्थिक विकास और पर्यटन को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। राज्य सरकार एक तरफ जहां नवी मुंबई के साथ पुणे एयरपोर्ट पर कृपा दिखा रही है, वहीं नागपुर सहित विदर्भ के शहरों में स्थित एयरपोर्ट को नंजरअंदाज किया जा रहा है।
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नागपुर पर कब जाएगा ध्यान
15 अतिरिक्त उड़ान स्लॉट स्वीकृत किए जाने के चलते पुणे हवाई अड्डे की हवाई कनेक्टिविटी मई में बढ़ने जा रही है इससे हवाई अड्डे के कुल स्लॉट की संख्या 220 से बढ़कर 235 हो जाएगी। लेकिन तेजी से विकसित होते नागपुर पर सरकार का ध्यान कब जायेगा।
सीएम देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने ही गृहनगर के एयरपोर्ट पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कई वर्षों से यहां पर 60 से अधिक उड़ानें बढ़ नहीं पाई हैं। कई स्थानों के शुरू की गई उड़ानों पर भी ब्रेक लगा दिया गया है। इससे यात्रियों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नागपुर एयरपोर्ट की इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में पहचान जरूर है, लेकिन यहां से
शारजाह और दोहा के अलावा अन्य देशों के लिए किसी तरह की कोई कनेक्टिविटी नहीं है। इसके लिए जन प्रतिनिधियों द्वारा किसी तरह से प्रयास भी नहीं किये जा रहे हैं। यात्रियों को विदेश जाने के लिए मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद का सहारा लेना पड़ता है।
बढ़ता चला जा रहा है इंतजार
सेकंड रनवे के साथ एयरपोर्ट के विकास के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दिये गये आश्वासन का इंतजार बढ़ता चला जा रहा है।
राज्य के बड़े शहरों के एयरपोर्ट पर सरकार जब इतनी अधिक मेहरबानी दिखा सकती है, तो नागपुर और विदर्भ के अन्य एयरपोर्ट पर इतनी अधिक सुस्ती क्यों दिखाई जा रही है। भोपाल, रायपुर, हैदराबाद सहित अन्य आसपास के एयरपोर्ट से पिछड़ता जा रहा नागपुर एयरपोर्ट कहीं केवल नाम का ही इंटरनेशनल बनकर न रह जाये। एक तरफ विदर्भ के विकास की बात की जाती है और ऊपर से यहां के एयरपोर्ट के लिए केवल आश्वासन की घुटी दी जाती है।
पैदा होते निवेश और रोजगार के नए अवसर
- स्थानीय व्यापारियों और उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि नागपुर, अमरावती, चंद्रपुर और गोंदिया जैसे शहरों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिलती, तो निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते थे।
- वहीं जनप्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। वहीं संगठनों का मानना है कि विदर्भ जैसे भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र को ‘उड़ान योजना’ से जोड़ना न केवल क्षेत्रीय असंतुलन को कम करेगा, बल्कि पूरे राज्य के विकास को भी गति देगा।
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काफी अहम है ‘उड़ान’
नागपुर जैसे उभरते शहर के लिए ‘उड़ान’ योजना में अधिक से अधिक फ्लाईट मिलना समय की मांग है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रयासों को सफल बनाने में इस योजना की अहमियत काफी है। नागपुर सहित पूरे विदर्भ के जिलों को इस योजना से जोड़ा जाना चाहिए। उन्नति, तरक्की इसी से मिलेगी। लेकिन अफसोस यह है कि नागपुर को ही इस योजना के तहत महत्व नहीं दिया जा रहा है। नागपुर से अन्य बड़े राज्यों में आने-जाने वाले लाखों लोग हैं, परंतु सभी को कनेक्टिंग पलाईट पर ही निर्भर रहना पड़ता है। सीधी फ्लाईट जल्द से जल्द मिले।
– कृष्णा खोपड़े, विधायक
