गुड्धे को सुप्रीम कोर्ट का झटका, चुनावी याचिका खारिज, फडणवीस को राहत

Supreme Court: नागपुर में प्रफुल्ल गुड्धे की चुनाव याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की। देवेंद्र फडणवीस की जीत पर लगी चुनौती खत्म, कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।
गुड्धे को सुप्रीम कोर्ट का झटका
गुड्धे को सुप्रीम कोर्ट का झटका (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nagpur Election Case: दक्षिण-पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे प्रफुल्ल गुड्धे ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए देवेंद्र फडणवीस की जीत को चुनौती दी थी। इस पर हुई लंबी सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने गुड्धे की दलीलों को खारिज करते हुए याचिका ठुकरा दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी है। इससे गुड्धे को झटका और फडणवीस को राहत मिली है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि 1 जनवरी 2025 को निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित संपूर्ण वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, फॉर्म 17-सी (भाग-1 व भाग-2) और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग को आवेदन दिया गया था। इसके बाद 2 अप्रैल 2025 को भी स्मरण पत्र भेजकर दस्तावेज उपलब्ध कराने का पुनः अनुरोध किया गया, किंतु याचिका दायर होने तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024

याचिका में मांग की गई थी कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के संचालन से संबंधित संपूर्ण वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज, दिशानिर्देशों की हैंडबुक, और नियमों में निहित अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के आदेश चुनाव आयोग को दिए जाएं। साथ ही फॉर्म 17-सी भाग-1 और भाग-2 की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी।

सुरक्षित रखी जाए पूरी जानकारी

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के चुनाव संचालन से जुड़ी सभी जानकारी को नियमों और प्रावधानों के अनुसार संरक्षित रखने के आदेश दिए जाएं। अंतरिम राहत के रूप में याचिका लंबित रहने के दौरान संपूर्ण दस्तावेजी जानकारी को सुरक्षित रखने के आदेश जिला चुनाव अधिकारी को देने का अनुरोध भी किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया कि चुनाव अधिसूचना जारी होने से लेकर मतदान दिवस तक व्यापक कुप्रबंधन रहा। मतदान मशीनों को समय पर नहीं बदला गया और फर्जी मतदान सहित कई अनियमितताएं सामने आईं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 तथा चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के विरुद्ध थीं।

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