डालडा फैक्ट्री चौक निजी बसें (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Private Bus: सीपी रवींद्र कुमार सिंगल और डीसीपी ट्रैफिक लोहित मतानी द्वारा प्राइवेट बसों पर लगाए गए प्रतिबंध से नागरिकों को बड़ी राहत मिली। केवल आग्याराम देवी चौक, एसटी स्टैंड, मॉडेल मिल रोड, डालडा कंपनी चौक, कृपलानी चौक और छत्रपति चौक पर बसों का स्टॉपेज बंद होने से यातायात सुगम हो गया। 14 अगस्त से पुलिस ने बसों पर लगाम कसना भी शुरू कर दिया था और निर्देशों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
1 सप्ताह तो सब कुछ सही तरीके से चलता रहा लेकिन धीरे-धीरे ट्रैवल्स संचालक फिर पैर पसारने लगे। पुलिस कार्रवाई भी कर रही थी लेकिन अब लोकल बस संचालकों ने तो मानो पुलिस के निर्देशों की कॉपी कचरे के ढेर में डाल दी है। अब दोबारा बसों का स्टॉपेज शुरू हो गया है। यह बात भी उतनी ही सही है कि यह काम पहले की तरह नहीं चल रहा है लेकिन लगता कि कुछ ट्रैवल्स संचालकों ने दोबारा सेटिंग कर ली हो।
हाई कोर्ट ने सख्त दिशा-निर्देश दिए थे कि एसटी स्टैंड के 200 मीटर के क्षेत्र में कोई निजी बस नहीं रुकेगी और न सवारी लेगी लेकिन अब दोबारा ट्रैवल्स संचालकों की मनमानी शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने अपना रूट बदल लिया है लेकिन शहर की सड़कों पर अब भी बसें रोकी जा रही हैं। लोकल बस संचालक तो मानो पुलिस को कुछ समझते ही नहीं।
छत्रपति चौक पर अब भी नगरारे बंधु, हिंदुस्तान ट्रैवल्स, मां दुर्गा, रिद्धि, ओम साईं, श्री साईं की बसों को रास्ते पर पार्क करते देखा जा सकता है। आश्चर्य की बात ये है कि स्थानीय ट्रैफिक जोन के अधिकारी और कर्मचारियों को यह दिखाई नहीं देता। चंद्रपुर, यवतमाल और वर्धा जाने वाली बसें अब भी जगह-जगह रुककर सवारी ले रही हैं। वहीं गड़चिरोली जाने वाली बसें भी उमरेड रोड पर सक्करदरा के पास स्टॉपेज ले रही हैं।
इससे यह तो साफ है कि आला अधिकारी व्यवस्था बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन जिन्हें व्यवस्था बनाए रखनी है वे सरासर निर्देशों को हवा में उड़ा रहे हैं। केवल इतना ही नहीं, सीपी ने सिटी में नो-हॉर्न मुहिम भी चलाई है लेकिन इन बसों पर लगे हूटर और हाईप्रेशर हॉर्न से अब भी नागरिक परेशान हैं।
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पहले की तरह सभी स्टॉपेज पर ट्रैवल्स कंपनियों के दलाल अभी भी बने हुए हैं। विशेष तौर पर एसटी स्टैंड के आसपास के क्षेत्र में अपराधी बसों का संचालन कर रहे हैं। अपराधियों के गुर्गे बसों में सवारी बैठाने की एवज में पैसा भी लेते हैं।
शहर से बसों का संचालन करने वाले जिन बड़े ट्रैवल्स संचालकों के पास पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, केवल उन्हें ही ऑपरेशन की अनुमति दी गई है। उन्हें केवल अपने पार्किंग जोन में सवारी बैठानी है और उसी जगह पर उतारनी भी है लेकिन अब बड़े ट्रैवल्स संचालक भी पुलिस के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे हैं।
छत्रपति चौक के समीप लांग रूट की बसों का स्टॉपेज अब भी हो रहा है। धीरे-धीरे करके अब वापस बस संचालक उसी जगह पर आ रहे हैं। इससे साफ है कि स्थानीय अधिकारी और कर्मचारियों से उनकी ‘सेटिंग’ है। कुछ जगहों पर कार्रवाई करके अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है।