एम्स में हों सिकलसेल व थैलेसीमिया का इलाज, संस्था के स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा

Nitin Gadkari
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नागपुर. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आदिवासी व पिछड़ा वर्ग क्षेत्र में बच्चों में सिकलसेल व थैलेसीमिया अधिक पाया जाता है. अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) में इस बीमारी का इलाज किया जाना चाहिए. इससे गरीब व जरूरतमंदों को राहत मिलेगी. गडकरी एम्स के स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे. कार्यक्रम में एम्स की संचालक डॉ. विभा गुप्ता व अन्य डॉक्टर उपस्थित थे.

इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि पिछड़ा भागों में अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों में सिकलसेल और थैलेसीमिया के अधिक है. इस बीमारी के इलाज के साथ ही अवयव प्रत्यारोपण की सुविधा भी एम्स में होनी चाहिए. इससे जरूरतमंदों को लाभ मिलेगी. साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में महंगे खर्च से बच सकेंगे. नागपुर मेडिकल का अब बन रहा है. विदर्भ व पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से भी हर दिन मरीज यहां आते हैं. इनमें निर्धन मरीजों की संख्या अधिक होती है.

बाहर से आने वाले मरीजों को मिले सुविधा 

बाहर से आने वाले मरीजों की व्यवस्था नहीं होती. इन मरीजों के इलाज के साथ ही सुविधाओं के बारे में भी इंतजाम किया जाना चाहिए. गढ़चिरोली आदिवासी भाग है. मेडिकल के विद्यार्थियों को इन भागों में भेजकर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना चाहिए. इससे छात्रों को भी सीखने को मिलेगी.

गडकरी ने कहा कि शासन की विविध विभाग में अनेक तरह के अनुसंधान शुरू है लेकिन समन्वय के अभाव में विभागों का ही विभागों के बारे में जानकारी नहीं होती. यदि आपसी तालमेल हो तो अनुसंधान का लाभ जनता को मिलेगा. बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए एम्स को भविष्य में नियोजन करना होगा. कोरोना काल में एम्स ने अच्छा कार्य किया. अब देश में सर्वोत्कृष्ट और नंबर एक की श्रेणी में है.

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