संजय निरुपम और कृपाल तुमाने (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Shiv Sena Politics: शिवसेना (शिंदे गुट) प्रमुख एवं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए विदर्भ क्षेत्र में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया है। इस बदलाव के तहत नागपुर-रामटेक क्षेत्र की संगठनात्मक संरचना में बड़ा परिवर्तन किया गया है।
पूर्व सांसद व वर्तमान विधायक कृपाल तुमाने का नागपुर-रामटेक लोकसभा क्षेत्र से सीधा संगठनात्मक संबंध समाप्त कर उन्हें चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र का संपर्क प्रमुख बनाया गया है। वहीं नागपुर की जिम्मेदारी पूर्व सांसद संजय निरुपम को सौंपी गई है, जबकि रामटेक लोकसभा क्षेत्र के लिए अनिल कोकील को संपर्क प्रमुख नियुक्त किया गया है। संजय निरुपम इससे पहले भी शिवसेना में रहते हुए नागपुर में संपर्क प्रमुख की भूमिका निभा चुके हैं। उस दौरान
उन्होंने विशेष रूप से उत्तर भारतीय समाज को पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया था। बाद में आंतरिक मतभेदों के चलते वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हाल ही में शिंदे गुट में वापसी के बाद उन्हें फिर से नागपुर में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि उनके पूर्व कार्यकाल के कई कार्यकर्ता वर्तमान में कांग्रेस में होने से संगठन खड़ा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, रामटेक क्षेत्र में विधायक एवं वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल और कृपाल तुमाने के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। इन मतभेदों के कारण स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में 2 गुट बनने की चर्चा थी। ऐसे में भविष्य में विवाद टालने के उद्देश्य से रामटेक में अनिल कोकील की नियुक्ति की गई है।
इसके अलावा पूर्व विदर्भ के प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे पूर्व मंत्री डॉ. दीपक सावंत को इस पद पर नियमित रूप से नियुक्त किया गया है। उनके अधीन नागपुर, भंडारा और गोंदिया जिले रहेंगे। वहीं वर्धा, चंद्रपुर और गड़चिरोली जिलों के लिए विधायक मनीषा कायंदे को संपर्क प्रमुख बनाया गया है, पश्चिम विदर्भ में अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल और बुलढाना जिलों की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री संजय राठौड़ के पास यथावत रखी गई है। जिससे उनके प्रभाव को बरकरार रखा गया है।
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विधायक कृपाल तुमाने ने कहा पार्टी नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। जिस नेता का जो खुद का निर्वाचन क्षेत्र है उसे छोड़कर अन्य सभी नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संपर्क के लिए दी गई है। खुद डॉ. श्रीकांत शिंदे को उनके कल्याण क्षेत्र के अलावा ठाणे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसका कारण यह है कि कार्यकर्ता स्थानीय नेता को अक्सर ‘टेक इट इजी’ ले लेते हैं। उन्हें लगता है कि यह तो अपना ही व्यक्ति है। यह बात कई बार संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। आखिरकार यह एक ‘पॉलिसी डिसीजन’ है और हमे स्वीकार है। पाटीं द्वारा दी गई जिम्मेदारी को हम पूरी निष्ठा से निभाएंगे।