प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court On RTE Admission 2026: आरटीई प्रवेश को लेकर सरकार की ओर से जटिल शर्तों के साथ जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए आशीष फुलझेले, अनिकेत कुत्तरमारे और अन्य द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की ओर से कई बार आदेश जारी किए गए। यहां तक कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से 3 किमी के दूरी की शर्त तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से इसका पालन नहीं किए जाने पर न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट रूप से 3 किमी की शर्त हटाने तथा तुरंत एडमिशन पोर्टल शुरू करने का आदेश सरकार को दिया।
हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों के प्रवेश के लिए दूरी की पाबंदी नहीं होनी चाहिए और सरकार को तुरंत एडमिशन पोर्टल शुरू करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक (महाराष्ट्र राज्य, पुणे) का एक पत्र प्रस्तुत किया।
इस पत्र में कहा गया था कि यदि 3 किमी की दूरी का मानदंड लागू किया जाता है तो 95% से 97% छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिल जाएगा और शेष छात्रों को 3 किमी के दायरे के बाहर के स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। हालांकि अदालत ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह संचार 12 मार्च 2026 के पिछले अदालती आदेश के विपरीत है जिसमें दूरी के प्रतिबंध को हटाने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने प्रतिवादियों को आदेश दिया कि वे RTE अधिनियम, 2009 और कोर्ट के पिछले आदेशों के अनुसार ही कार्य करें। याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि आरटीई प्रवेश के लिए पोर्टल अभी तक नहीं खुला है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी सुधारात्मक कदम उठाएं और एडमिशन पोर्टल को तुरंत क्रियाशील बनाएं।
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सुनवाई के शुरुआत में याचिकाकर्ताओं के वकील ने पिछली तारीख पर आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी न दे पाने के लिए अदालत से माफी मांगी। इस चूक के कारण कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने वकील की माफी स्वीकार कर ली है और याचिकाकर्ताओं ने जुर्माने की राशि जमा करने की सहमति दी है। इस मामले में हस्तक्षेप के लिए भी एक आवेदन दायर किया गया है जिस पर सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांगा है।