निजी बसें फिर सिटी के अंदर, पुलिस ‘बाहर’, सभी जगह रुकने लगी बसें, पुलिस वादा भूली
Traffic Police Inaction Nagpur: निजी बसें नागपुर शहर में प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम रुक रही हैं, ट्रैफिक बाधित कर रही हैं और पुलिस कार्रवाई से बच रही हैं। यात्रियों की परेशानी फिर बढ़ी।
- Written By: आंचल लोखंडे
निजी बसें फिर सिटी के अंदर, पुलिस ‘बाहर’ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nagpur News: निजी बसें एक बार फिर शहर की सीमा के भीतर खुलकर दौड़ रही हैं। प्रतिबंध के बावजूद वे सड़कों पर बेधड़क रुक रही हैं, यात्रियों को चढ़ा-उतार रही हैं और ट्रैफिक व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। कई स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई न होना यही दर्शाता है कि अधिकारी अपने किए वादे भूल चुके हैं। शहरवासियों को राहत देने के जो आश्वासन दिए गए थे, वे अब केवल कागजों में सिमटकर रह गए हैं और लोग दोबारा पुरानी समस्या से जूझने लगे हैं।
अगस्त में ट्रैफिक पुलिस द्वारा इनर रिंग रोड के भीतर पिक-अप और ड्रॉप गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू करने के बावजूद कई निजी ऑपरेटर।विशेषकर छोटी दूरी वाले।खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। यहां तक कि कुछ लंबी दूरी के ऑपरेटरों ने भी अपने पुराने ठिकानों पर बसें रोकना शुरू कर दिया है, जिससे व्यस्त समय में भीड़ और बढ़ने लगी है।
उल्लंघन के प्रमुख स्थल
- छत्रपति चौक, कृपलानी चौक, बैद्यनाथ चौक
- गणेशपेठ बस स्टैंड, भोले पेट्रोल पंप
- गीतांजलि टॉकीज, तुली मॉल, रविनगर चौक
चंद्रपुर, वर्धा और यवतमाल की ओर जाने वाली कई बसें लगभग 15 मिनट तक सड़क पर खड़ी रहती हैं, जिससे यातायात बाधित हो जाता है। शाम के समय भोले पेट्रोल पंप चौक पर लंबी दूरी की बसों को भी यात्रियों को भरते देखा गया, हालांकि यहां कभी-कभी यातायातकर्मी कार्रवाई करते दिखाई दिए।
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छोटी दूरी के ऑपरेटर मुख्य समस्या
सूत्रों के मुताबिक अधिकांश लंबी दूरी के ऑपरेटर निर्धारित पार्किंग से ही यात्रियों को बैठाने के नियम का पालन कर रहे हैं। मगर बाहर से आने वाले छोटी दूरी के ऑपरेटर नियमों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। कई बार इन ऑपरेटरों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हो चुकी है। छत्रपति चौक के पास एक चाय विक्रेता ने बताया।“पुलिस की गाड़ी दिखते ही बसें तुरंत भागती हैं, वरना सड़क पर ही यात्रियों को बैठाती रहती हैं।”
पुलिस बनी ‘दर्शक’
ट्रैफिक के डीसीपी लोहित मतानी ने शुरुआत में कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया था। कुछ समय के लिए सड़कें सुचारू दिखने लगी थीं, लेकिन अब ढिलाई फिर बढ़ गई है और बस ऑपरेटर इसका लाभ उठा रहे हैं। बसों के रुकते ही ऑटो का जमघट भी लग जाता है, जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है। पुलिस का कहना है कि कुछ बस ऑपरेटर बार-बार कार्रवाई के बाद भी मानने को तैयार नहीं, ऐसे ऑपरेटरों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव विचाराधीन
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यात्रियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
कुछ यात्री ढिलाई का स्वागत कर रहे हैं । “अब चढ़ना आसान हो गया है”बाहरी जिलों से आने वाले यात्री कहते हैं। “निश्चित पार्किंग तक जाने में लगने वाला समय बच रहा है”हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि समर्पित पार्किंग स्थल चिन्हित किए बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं।
आउटर रिंग पर बस पार्किंग प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
जब मुद्दा गर्म था, तब ट्रैफिक विभाग और मनपा ने 4 स्थानों पर बस पार्किंग हेतु जमीन चिन्हित की थी। लेकिन आगे कोई कार्रवाई न होने से मामला अटक गया है । जिससे यह प्रशासनिक लापरवाही व जनता के लिए बढ़ता सिरदर्द माना जा रहा है।
