नागपुर में रक्षक ही बने भक्षक; पुलिसकर्मियों ने किया व्यापारी का अपहरण, मांगी 15 लाख की फिरौती
नागपुर पुलिस ने एक व्यवसायी का अपहरण कर उससे फिरौती मांगने के मामले में 2 पुलिसकर्मी सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह सनसनीखेज मामला हुड़केश्वर थाना क्षेत्र से सामने आया है।
- Written By: आकाश मसने
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
नागपुर: नागपुर पुलिस के कर्मचारियों की लगातार आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका सामने आ रही है। अब एक व्यवसायी का अपहरण कर उससे फिरौती मांगने के मामले में 2 पुलिसकर्मी सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह सनसनीखेज मामला हुड़केश्वर थाना क्षेत्र से सामने अया है। पकड़े गए आरोपियों में रघुजीनगर क्वार्टर निवासी गौरव पुरुषोत्तम पराले, सीताबर्डी पुलिस क्वार्टर निवासी राजेश उत्तमराव हिवराले और रघुजीनगर निवासी आकाश राजू ग्वालबंशी का समावेश है।
गौरव पराले और राजेश हिवराले सिटी पुलिस के कांस्टेबल हैं और उनकी तैनाती बजाजनगर थाना में है। आकाश रघुजीनगर में कैफे चलाता है और गौरव का बचपन का दोस्त है। इस मामले में टिप देने वाला आरोपी विक्रांत मेश्राम अभी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। पुलिस ने खारघर, मुंबई निवासी अजय मोतीराम वाघमारे (37) की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। अजय आईबिल्ड फिनकॉर्प ट्रेड कंपनी के संचालक हैं। इस कंपनी के माध्यम से रियल एस्टेट और अनाज के आयात-निर्यात का व्यवसाय करते हैं।
20 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया
रविवार को उनकी कंपनी द्वारा हुड़केश्वर रोड के क्वीन्स सेलिब्रेशन लॉन में नागपुर और आसपास के इलाकों के लिए सेमिनार आयोजित किया गया था। दोपहर 1.30 बजे के दौरान अजय अपने सहयोगी दिलीप शिंदे और गिरीधर निखारे के साथ लॉन के सामने पहुंचे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी (गौरव) ने खिड़की पर दस्तक दी।
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ऐसे दिया घटना को अंजाम
अजय के बारे में पूछा और कहा कि पीछे एक कार में साहब बैठे हैं। उनसे बातचीत करने के लिए चलो। अजय अपनी गाड़ी से उतरे तो पीछे सफेद रंग की इनोवा गाड़ी क्र. एमएच 27 बीई 0900 में राजेश बैठा था। अजय को बीच की सीट पर बैठाया गया। गाड़ी आकाश चला रहा था और पिछली सीट पर एक व्यक्ति बैठा था। अजय के बैठते ही गाड़ी चल पड़ी।
गाड़ी चलना शुरू हुई इसके बाद राजेश ने अजय से कहा कि उनके द्वारा 20 करोड़ रुपए का घोटाला करने की शिकायत मिली है। इस मामले में गिरफ्तारी होगी। यदि केस रफादफा करना है तो 15 लाख रुपए देने होंगे। अजय ने कहा कि उन्होंने कोई घोटाला नहीं किया है और इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकते।
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6 घंटे तक बंधक बनाकर शहरभर में घुमाया
अजय ने आरोपियों को 3 लाख रुपए की पेशकश की लेकिन आरोपी 15 लाख पर ही अड़े रहे और पुलिस थाने ले जाकर लॉकअप में बंद करने की धमकी दी। फिर अजय को आरोपी पुलिस थाने न ले जाते हुए शहरभर में घुमाते रहे। उसके तीनों फोन और पर्स भी आरोपियों ने ले लिए। आखिर अजय ने अपने सहयोगी दिलीप को फोन कर रकम का इंतजाम करने को कहा।
दिलीप ने पूछताछ करने का प्रयास किया लेकिन आरोपी धमकाते रहे। आखिर दिलीप ने नागपुर में कंपनी का काम देखने वाले झोड़े नामक व्यक्ति को कॉल किया। झोड़े ने तुरंत हुड़केश्वर के थानेदार ज्ञानेश्वर भेदोड़कर को फोन कर नकली पुलिस द्वारा अपहरण किए जाने का संदेह जताया और 6 घंटे से बंधक बनाए रखने की जानकारी। भेदोड़कर ने अजय के फोन का लोकेशन लेकर तुरंत अपनी टीमों को रवाना किया और गाड़ी को नरेंद्रनगर पुलिया के समीप रोका गया।
2 दिन की पुलिस हिरासत
परेशान होने के कारण अजय ने सोमवार को शिकायत दर्ज करने का निवेदन किया। असली पुलिस कर्मचारियों की अपहरण और फिरौती में भूमिका सामने आने पर सीपी रवींद्र कुमार सिंगल ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए। पुलिस ने गौरव, राजेश और आकाश को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को उन्हें कोर्ट में पेश कर 2 दिन की पुलिस हिरासत ली गई। इसके साथ ही सीपी ने गौरव और राजेश को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के भी आदेश दिए हैं।
भेदोड़कर ने बताया कि गौरव और राजेश को विक्रांत मेश्राम ने टिप दी थी। उसने बताया था कि अजय के पास बहुत पैसा है। महज धमकाने पर ही वह 15-20 लाख रुपए दे देगा। गौरव ने वाहन किराये पर लिया। ड्राइवर के तौर पर उसने अपने दोस्त आकाश को साथ रख लिया। पुलिस अब विक्रांत की तलाश में जुट गई है।
