Odisha to Mumbai Ganja Smuggling प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Nagpur Drug Seizure: नागपुर ग्रामीण पुलिस और NDPS (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 की सुबह करीब 5 बजे मौदा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत माथनी टोल प्लाजा के पास से 505 किलो गांजा जब्त किया गया। इस खेप को उड़ीसा के संबलपुर से ट्रक के जरिए मुंबई ले जाया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त किए गए इस गांजे की कीमत लगभग 2 करोड़ 72 लाख रुपये आंकी गई है।
खुफिया जानकारी के आधार पर नागपुर पुलिस ने जाल बिछाया और संदिग्ध ट्रक को घेर लिया। ट्रक में लोहे के सामान के नीचे गांजे की बोरियों को छिपाकर रखा गया था ताकि किसी को शक न हो। पुलिस ने मौके से ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है और अब इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं की तलाश की जा रही है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो टीम को सटीक इनपुट मिला था कि एक 12 पहियों वाला ट्रक (नंबर WB 23 B 7992) भारी मात्रा में मादक पदार्थ लेकर नागपुर के रास्ते मुंबई की ओर बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही मौदा टोल बूथ के पास नाकाबंदी की गई। आर्यन रेस्टोरेंट ढाबे के पास संदिग्ध ट्रक खड़ा मिला। जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो चालक ने भागने की कोशिश की लेकिन उसे दबोच लिया गया। पूछताछ में चालक ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बताया कि ट्रक में केवल लोहा लदा है, लेकिन गहन तलाशी में सच सामने आ गया।
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ट्रक की तलाशी लेने पर पुलिस को लोहे की चादरों और कबाड़ के नीचे छिपी 20 प्लास्टिक की बोरियाँ मिलीं। जब इन बोरियों को खोला गया, तो उनमें उच्च गुणवत्ता वाला 505 किलो गांजा बरामद हुआ। गिरफ्तार आरोपी की पहचान संजय यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए मालवाहक ट्रक का उपयोग किया था, जो आमतौर पर औद्योगिक सामान ले जाते हैं।
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि गांजे की यह बड़ी खेप उड़ीसा के संबलपुर जिले से लोड की गई थी। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि मुंबई में यह माल किसे डिलीवर किया जाना था। पुलिस सब-इंस्पेक्टर शिवाजी तिपुरने ने बताया कि इस तस्करी के पीछे एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ होने की संभावना है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल कॉल डिटेल्स और जीपीएस लोकेशन की मदद से उन लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जो इस काले कारोबार को वित्तपोषित (Fund) कर रहे थे।