बदहाल सड़कें-खुले मेनहोल बने मौत का जाल, अदालत मित्र ने हाई कोर्ट में रखी रिपोर्ट, खोली मनपा की पोल

NMC Nagpur: नागपुर में सार्वजनिक कुंए और खुले मेनहोल मौत का जाल बिछाए हुए जगह-जगह मौजूद है। इसके खिलाफ हाई कोर्ट पर याचिका दायर की गई, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया।
NMC Nagpur: नागपुर में सार्वजनिक कुंए और खुले मेनहोल मौत का जाल बिछाए हुए जगह-जगह मौजूद है। इसके खिलाफ हाई कोर्ट पर याचिका दायर की गई, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया।
खुले मेनहोल (सौजन्य-नवभारत)
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Nagpur News: नागपुर में खुले सार्वजनिक कुएं में गिरने के कारण मौत होने पर मां की ओर से मुआवजे के लिए गुहार लगाई गई। पहले तो मनपा के पास आवेदन किया गया किंतु बात नहीं बनने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की गई। आशा भगत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सिटी में 10 हजार से अधिक मेनहोल खुले होने को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबर पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लिया गया।

हाई कोर्ट ने सिटी में इस तरह के कितने मेनहोल खुले हैं, जिसकी वजह से त्रासदी है, इनकी वास्तविकता उजागर करने के निर्देश अदालत मित्र को दिए थे। इस संबंध में बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत मित्र शिल्पा गिरटकर की ओर से हलफनामा दायर किया गया। इसमें बदहाल सड़कें और खुले मेनहोल के कारण सिटी में मौत का जाल फैला होने का आरोप लगाया गया।

सुनवाई के दौरान इसका जवाब दायर करने के लिए मनपा की ओर से समय मांगे जाने पर हाई कोर्ट ने समय प्रदान कर सुनवाई स्थगित कर दी। गत समय मनपा की ओर से दिए गए हलफनामा में बताया गया था कि सिटी में सीवरेज के कुल 1,53,633 मेनहोल हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 3,078 कवर बदले गए हैं।

सड़क सुरक्षा की खतरनाक स्थिति

हलफनामा में बताया गया कि गड्ढों की मरम्मत न करना केवल असुविधा नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा के संबंध में एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है। सिटी में सड़कों का खराब रखरखाव और मानसून के दौरान लगातार नुकसान गड्ढों की संख्या में वृद्धि करता दिखाई दे रहा है जिससे दुर्घटनाएं, वाहनों का नुकसान और यहां तक कि जानलेवा हादसे होते हैं। सड़कों के बीचोबीच और यहां तक कि फुटपाथों पर भी बड़े-बड़े गड्ढे हैं। विशेष रूप से मोटर साइकिल सवारों को गंभीर चोट या मौत का सामना करना पड़ता है जब वे अचानक इन गड्ढों में फंस जाते हैं। तेज गति से चलने वाले वाहन संतुलन खो देते हैं। परिणामस्वरूप घातक दुर्घटनाएं होती हैं। बरसात के मौसम में पानी से भरे गड्ढे इन खतरों को और बढ़ा देते हैं। हलफनामा के साथ अदालत मित्र ने सिटी के विभिन्न हिस्सों के फोटो भी प्रस्तुत किए।

अब तक 350 शिकायतें

  • मनपा के दावे के अनुसार 1 जनवरी, 2025 से अब तक 350 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 338 का समाधान किया जा चुका है और 12 शिकायतों पर काम चल रहा है।
  • क्षतिग्रस्त मेनहोल या मेनहोल कवर की मरम्मत या पुन: बनाने संबंधी जोन कार्यालय द्वारा शिकायत मिलने के तीन दिनों के भीतर किया जाता है। मनपा ने टिकाऊ स्टील फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट (SFRC) मेनहोल कवर खरीदने का निर्णय लिया है।
  • इसके लिए 10,000 SFRC मेनहोल कवर के लिए टेंडर जारी किया गया है और कुछ अतिरिक्त कवर पहले से ही तैयार हैं।

स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज पर 95,571 कवर

मनपा के दावे के अनुसार स्ट्रॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के तहत बनीं नालियों पर लगभग 95,571 कवर सभी 10 जोन में चिंता का विषय हैं। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में 2,204 कवर बदले गए हैं। मनपा ने स्पष्ट किया कि एनआईटी, एनएमआरडीए, राज्य पीडब्ल्यूडी, सेंट्रल पीडब्ल्यूडी, बीएसएनएल, एमएसईडीसीएल, महा मेट्रो जैसे विभिन्न प्राधिकरण भी सड़कों के नीचे अपनी उपयोगिताओं के लिए खुदाई तो करते हैं किंतु ज्यों का त्यों छोड़ देते हैं। मनपा इन प्राधिकरणों द्वारा छोड़े गए खुले नालों को ढकने का काम करती है। मनपा ने कहा कि वह जनहित याचिका क्रमांक 1/2020 में न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न आदेशों का पालन कर रही है।

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