

Nagpur One Lawyer One Vote: नागपुर जिले में 'एक वकील-एक वोट' के सिद्धांत को लागू करने की मांग करते हुए अधि। मोहन सुदामे की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने विदर्भ क्षेत्र के विभिन्न बार एसोसिएशनों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो अदालत यह मान लेगी कि बार एसोसिएशनों को याचिकाकर्ता की मांगों पर कोई आपत्ति नहीं है।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी की ओर से पेश हुए वकील वाई.एन. सांबरे ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की। वहीं याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे वकील अक्षय सुदामे ने अदालत के ध्यान में यह बात लाई कि संपूर्ण विदर्भ क्षेत्र के एडवोकेट बार एसोसिएशनों को इस याचिका में पक्षकार बनाया गया है और उन्हें विधिवत नोटिस भी तामील किए जा चुके हैं। इसके बावजूद किसी भी बार एसोसिएशन ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर प्रदान किया। हाई कोर्ट ने गत समय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के आगामी चुनावों में 'एक बार एक वोट' के सिद्धांत को तत्काल लागू करने का आदेश दिया था। इसी सिद्धांत को अन्य बार एसोसिएशन के चुनावों में भी लागू किया जाना है।
गत समय HCBA की ओर से 'एक बार एक वोट' की स्थिति पर विवाद नहीं किया गया था, लेकिन तर्क दिया गया था कि इस नीति को धीरे-धीरे लागू किया जाना चाहिए क्योंकि चुनाव पहले ही घोषित हो चुके हैं। हस्तक्षेप करने वाले वकीलों ने याचिका का विरोध इस आधार पर किया था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2011 में आया था और याचिका 14 साल बाद दायर की गई है।
इसलिए इस नियम को आगामी चुनाव में लागू नहीं किया जाना चाहिए किंतु कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में पहले ही देरी हो चुकी है और 'एक बार एक वोट' की नीति को लागू करने के लिए किसी और घटना (जैसे लखनऊ में वकीलों के अभद्र व्यवहार) का इंतजार नहीं किया जा सकता।