पटाखों की आवाज पर लगेगी लगाम, 10 सालों में दुकानों की घटी संख्या, सिर्फ 822 दुकानों को मिली अनुमति

महंगाई की मार त्योहारों पर भी दिखाई दे रही है। यह अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गत 10 वर्षों में पटाखों की कीमतें बढ़ने के कारण त्योहारों में पटाखें उड़ाने का उत्साह लगातार कम होता दिखाई दी।
महंगाई की मार त्योहारों पर भी दिखाई दे रही है। यह अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गत 10 वर्षों में पटाखों की कीमतें बढ़ने के कारण त्योहारों में पटाखें उड़ाने का उत्साह लगातार कम होता दिखाई दी।
नागपुर न्यूज
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Nagpur News: मनपा के अग्निशमन विभाग द्वारा पटाखों की दुकान के लिए दिए जाने वाले लाइसेंस की संख्या से भी यही स्थिति उजागर हो रही है। पटाखे उड़ाने के लिए समय की पाबंदी ने भी अंकुश लगाने का काम किया है। आलम यह है कि इस वर्ष भी केवल 822 पटाखा दुकानों के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं। गत 10 वर्षों में इस संख्या में कमी होती आ रही है।

आतिशबाजी और पटाखे फोड़कर दिवाली मनाने की परंपरा है। 10 साल पहले शहर में लगभग 10 दिनों तक पटाखों की आवाज गूंजती थी लेकिन समय के साथ पटाखों में रुचि कम हो गई है। आज के युवा या बच्चे पटाखों में रुचि नहीं रखते हैं। अब केवल लक्ष्मी पूजा के दिन कुछ पटाखे फोड़े जाते हैं या आतिशबाजी की जाती है।

पटाखों की कीमतों में 100 प्रतिशत वृद्धि

  • इस वर्ष मनपा के 10 फायर स्टेशनों से 822 दुकानों की अनुमति दी गई है। पिछले साल शहर में 844 दुकानें थीं। 2020, 2021 में कोरोना के प्रभाव के कारण दुकानों की संख्या 650 पर आ गई थी।
  • 2022 में 750 पटाखा दुकानें थीं। 2015 में दिवाली पर शहर में 951 दुकानें थीं, 2016 में 982 दुकानें थीं। तब से पटाखा दुकानों की संख्या लगातार कम हो रही है।
  • पिछले 10 सालों में पटाखों की कीमतों में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक दुकानदार ने बताया कि दोगुनी कीमत बढ़ने से पटाखों के प्रति नागरिकों का आकर्षण कम हुआ है। पहले मौसम के हिसाब से दुकानें लगाने वाले भी पटाखे बेचते थे। अब पारंपरिक व्यापारी ही दुकानें लगाते हैं।

पर्यावरण को भी नुकसान

दिवाली के मौके पर भारी मात्रा में पटाखे फोड़ने से वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ गया था। इसलिए सरकार ने पटाखे फोड़ने का समय तय कर दिया। इसके अलावा विभिन्न पर्यावरण संगठनों ने भी जागरूकता अभियान शुरू किया। इसका नागरिकों पर असर पड़ा और कई लोगों ने पटाखे फोड़ने की बजाय एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर त्योहार मनाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसी से दिवाली पर पटाखों की बिक्री कम हो गई है। जिन जगहों पर बिजली के तार हैं वहां दुकानें नहीं लगाई जा सकतीं। दुकानों में अग्निशमन यंत्र और 200 लीटर पानी का ड्रम रखना अनिवार्य है। पटाखा व्यापारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बेसमेंट, सीढ़ियों आदि के पास पटाखे न रखें। दुकानदार निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

  • तुषार बाराहाते, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, मनपा

10 वर्षों में पटाखों की दुकानें

वर्ष संख्या
2106 982
2017 865
2018 777
2019 752
2020 582
2021 665
2022 756
2023 853
2024 844
2025 822
फायर स्टेशन ज़ोन दुकानों की संख्या
त्रिमुर्तिनगर लक्ष्मीनगर 125
सिविल लाइन्स धरमपेठ 41
नरेंद्र नगर हनुमान नगर 107
कॉटन मार्केट धंतोली 52
सक्करदरा नेहरूनगर 98
गंजीपेठ गांधीबाग 46
कलमना सतरंजीपुरा 20
लकड़गंज लकड़गंज 154
सुगतनगर आसीनगर 96
सिविल लाइंस मंगलवारी 83
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