नागपुर में 32 करोड़ का आवास घोटाला, सर्वे में खामियां, लाखों का नुकसान, प्रशासन पर उठे सवाल

Nagpur WCL Housing Scam: नागपुर के इंदर कॉलरी आवास घोटाले में 32 करोड़ की गड़बड़ी उजागर। जांच में सर्वे में खामियां और मुआवजा वितरण में अनियमितता सामने आई।
₹32 Crore Housing Scam in Nagpur: Flaws in Survey, Losses Worth Lakhs, Questions Raised Over Administration
वेकोलि आवास घोटाला( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nagpur Scam News: नागपुर जिले के पारशिवनी वेकोलि कामठी उपक्षेत्र अंतर्गत इंदर कॉलरी नंबर 6 में हुए आवास मूल्यांकन घोटाले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 32 करोड़ रुपये के इस प्रकरण में पहली बार वेकोलि नागपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने स्वीकार किया है कि लोकनिर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली के कारण वेकोलि की छवि धूमिल हुई है।

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब रामटेक के उपविभागीय अधिकारी प्रियेश महाजन ने 25 मार्च 2026 को इंदर कॉलरी नंबर 6 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट रूप से माना कि आवास मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।

इसके बाद 9 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसने 4 अप्रैल 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी रिपोर्ट के अनुसार, कुल 499 आवास धारकों में से केवल 383 का ही सर्वे किया गया, जबकि 52 लोगों ने सर्वे ही नहीं करवाया, वहीं 64 नागरिकों ने अपने मकान तोड़कर मुआवजा (चेक) प्राप्त किया।

जांच में यह भी सामने आया कि आवास निर्माण तिथि के संबंध में न तो वेकोलि और न ही लोकनिर्माण विभाग के पास कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध था, जिसके कारण नागरिकों द्वारा बताई गई तिथि को ही आधार माना गया।

इसी का फायदा उठाते हुए कथित रूप से कुछ कर्मचारियों ने रसूखदार लोगों को लाभपहुंचाने के लिए निर्माण तिथियों में हेरफेर की। समिति के सदस्य सुरेंद्र बुधे और विजय शुक्ला के अनुसार, कुल 36 आवास धारकों को अनाधिकृत रूप से लाखों रुपये का लाभ दिया गया। इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया में वेकोलि और लोकनिर्माण विभाग द्वारा आवासों के लिलाम जैसे कदम भी उठाए गए, जिससे संदेह और गहरा गया है।

शिकायत का नहीं मिलता जवाब

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों द्वारा वेकोलि नागपुर क्षेत्रीय महाप्रबंधक, उपक्षेत्रीय प्रबंधक कामठी, लोकनिर्माण विभाग पारशिवनी और केंद्रीय सतर्कता आयोग को 39 शिकायतें और 17 RT1 आवेदन दिए गए, लेकिन अधिकांश विभागों ने या तो कोई जवाब नहीं दिया या फिर गोलमोल जवाब देकर मामले को टाल दिया।

पहले भी हुई थी धांधली

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की अनियमितता सामने आई हो। वर्ष 2000 में भी आवासीय सर्वे के दौरान 70 कर्मचारियों को चेक और भूमि आवंटित की गई थी, जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी लाभ दिया गया था।

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