
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Nagpur Water Pollution News: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 20 लोगों की मौत, गुजरात की राजधानी गांधीनगर, आईटी सिटी बेंगलुरु के बाद अब नागपुर जिले के सावनेर में हुई जल प्रदूषण की घटना ने सबको हिलाकर रख दिया है। नागपुर के लोगों में भी दहशत का माहौल है। वे यह समझने का प्रयास करने लगे हैं कि वे जिस जल का इस्तेमाल कर रहे हैं वह कितना स्वच्छ है। घनी आबादी वाले डरे हुए हैं क्योंकि जलापूर्ति पाइपलाइन पुराने गटर लाइन से गुजरी है और कभी भी बड़ा हादसा होने की प्रबल आशंका है।
घनी आबादियों में पाइपलाइन और सीवरलाइन अलग करने में महानगर पालिका नाकाम साबित हुई है। गत अनुभवों को देखते हुए नागपुर शहर में भी इस तरह से दूषित पेयजल का तांडव होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। मनपा इसके लिए कितनी तैयार है, इस पर भी प्रश्न चिन्ह लगे हुए हैं।
मनपा के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से सिटी में कहीं दूषित जलापूर्ति न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। सिटी के सीवरेज नेटवर्क को भी इसी विभाग द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में महत्वपूर्ण इस विभाग की कार्यप्रणाली अब रडार पर आ गई है। लगातार दूषित जलापूर्ति की घटनाओं ने सभी वर्ग के लोगों के दिलों में दहशत पैदा कर दी है। इसे लेकर विस्तृत जांच-कदम उठाने की मांग कुछ संगठनों द्वारा की जाने लगी है।
स्वच्छता पर काम करने वालों का कहना है कि सिटी की जलापूर्ति योजना के साथ-साथ हैंडपंप और कुओं तक में प्रूदषण की मार है। कोई भी ऐसा माध्यम नहीं बचा है जहां शुद्ध जल की अपेक्षा की जा सके। कहीं प्रदूषण कम है, तो कहीं ज्यादा, लेकिन प्रदूषण है, यह सर्वविदित है।
न केवल नदियों के प्रदूषण बल्कि सिटी के सीवरेज के कारण होने वाले जल प्रदूषण को पूरी तरह से नियंत्रित करने की दिशा में 1200 करोड़ की योजना मनपा ने तैयार की। इसके जरिए प्रदूषण मुक्त कराने के लिए सीवरेज नेटवर्क पर इस निधि को खर्च किया जाना है। लंबे समय से इस परियोजना पर काम तो चल रहा है, किंतु अभी भी योजना का वास्तविक क्रियान्वयन शुरू नहीं हो पाया है। अधर में अटकी इस योजना के बीच अब अलग-अलग जगहों पर हो रहे हादसों के चलते मामला गंभीर होता जा रहा है।
जानकारों के अनुसार नागपुर सिटी के कई पुराने इलाकों में जलवाहिनी और सीवरेज वाहिनियों का जाल इस तरह है कि दोनों एक-दूसरे से सटकर जा रही हैं। यदि समय रहते इन वाहिनियों को अलग नहीं किया गया, तो भविष्य में अन्य शहरों की तरह यहां पर भी हादसों से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सिटी के कई इलाकों का सीवरेज नेटवर्क क्षतिग्रस्त है। यही कारण है कि बारिश के दिनों में सीवरेज का पानी सड़कों पर बहने लगता। कुछ इलाकों में बारिश के दौरान दूषित जलापूर्ति के भी कई उदाहरण उजागर होते हैं। हालांकि अब तक बड़े हादसों का कोई उदाहरण तो नहीं है, किंतु दूषित जलापूर्ति के उदाहरण नागपुर महानगरपालिका के लिए कोई नए नहीं हैं। यही कारण रहा कि इस परियोजना के तहत कुल 200 किलोमीटर लंबी सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का निर्णय लिया गया। यहां तक कि कई नए STP बनाने की योजना है। सिटी के भीतर का सीवरेज नेटवर्क दुरुस्त करने के साथ-साथ 16.58 किलोमीटर लंबी नाग नदी में गिरने वाले सभी सीवेज इनलेट्स को रोकना है।
परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड को सौंपी गई है। टीसीईएल ने मध्य क्षेत्र का सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसमें लक्ष्मीनगर, हनुमाननगर, धंतोली, नेहरूनगर, सतरंजीपुरा और लकड़गंज जैसे प्रमुख जोन शामिल हैं। अब उत्तरी क्षेत्र के लिए सर्वेक्षण शुरू हो चुका है और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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यह नया नेटवर्क दक्षिण क्षेत्र में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रही परियोजनाओं के साथ होगा। पोरा नदी परियोजना का काम, जो 2024 में शुरू हुआ था, 30% पूरा हो चुका है। कार्य में तेजी लाने के लिए मनपा इस परियोजना के लिए निविदाएं आमंत्रित करेगी, जिसमें मुख्य ट्रंक लाइनें और अन्य पाइपलाइन नेटवर्क शामिल होंगे।
देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहीं घटनाओं के बाद भी शुद्ध जलापूर्ति को लेकर मनपा गंभीर नहीं है। औपचारिकता के कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर की न तो नदी और न ही नाले शुद्ध हो सके हैं। अशुद्ध पानी भूमि के अंदर जा रहा है और लोग बोर और कुओं के जरिए इसका इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।






