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पिनाक से ड्रोन तक…नागपुर-वर्धा-अमरावती में बनेगा डिफेंस कॉरिडोर, 30,000 करोड़ का मेगा प्लान तैयार!

Maharashtra Government: महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर-वर्धा-अमरावती डिफेंस कॉरिडोर से विदर्भ को रक्षा हब बनाने का बड़ा ऐलान कर दिया है। ₹30,000 करोड़ का निवेश और हजारों नौकरियां।

  • By प्रिया जैस
Updated On: Jan 07, 2026 | 02:35 PM

डिफेंस कॉरिडोर (AI Generated Image)

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Vidarbha Industrial Policy 2026: महाराष्ट्र की नई औद्योगिक नीति के तहत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। राज्य को देश के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में नागपुर-वर्धा-अमरावती डिफेंस कॉरिडोर का ऐलान किया गया है। यह कॉरिडोर न सिर्फ उद्योग और निवेश को नई उड़ान देगा बल्कि विदर्भ के आर्थिक नक्शे को पूरी तरह बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार नागपुर, वर्धा और अमरावती को जोड़ते हुए करीब 250 किलोमीटर लंबे डिफेंस कॉरिडोर का विकास करेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अगले 5 वर्षों के भीतर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। डिफेंस कॉरिडोर के जरिए रक्षा उत्पादन से जुड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित किया जाएगा, साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी बड़े अवसर मिलेंगे।

नागपुर को इस कॉरिडोर का कोर डिफेंस और लॉजिस्टिक्स हब बनाया जाएगा जहां अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण, परीक्षण और सप्लाई चेन विकसित होगी। वर्धा और अमरावती में सहायक उद्योग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, ट्रेनिंग सेंटर्स और सपोर्ट यूनिट्स स्थापित की जाएंगी।

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इससे हजारों युवाओं को रोजगार, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह डिफेंस कॉरिडोर महाराष्ट्र को ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगा और विदर्भ को औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

वर्तमान में डिफेंस के बड़े प्रोजेक्ट

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री / क्षेत्र वार्षिक टर्नओवर (अनुमानित) प्रत्यक्ष रोजगार प्रमुख उत्पाद
चांदा फैक्ट्री ₹4,000 करोड़ 4,500 – 5,000 पिनाक, T-90 गोला-बारूद
भंडारा फैक्ट्री ₹2,000 करोड़ 1,500 हाई कैलिबर विस्फोटक
नागपुर फैक्ट्री ₹500 – 700 करोड़ 2,000 बम के खोल (Shells)
निजी क्षेत्र (Solar, Max, etc.) ₹12,000 – 15,000 करोड़ 6,000+ ड्रोन, हेलिकॉप्टर, मिसाइल घटक

70 के दशक में ही हुई पहचान

भौगोलिक स्थिति को देखकर 70 के दशक में ही विदर्भ की ताकत पहचान ली गई थी और आसपास के इलाकों में ऑर्डिनेंस फैक्टरियां लगा दी गई थी। फैक्टरियां बढ़ीं भी, चली भी, लेकिन इन फैक्टरियों की बदौलत जितनी निजी क्षेत्र की कंपनियां आनी चाहिए थी, नहीं आ पाईं। सरकार उदासीन हो गई और ऑर्डिनेंस फैक्टरियों के बलबूते हम बढ़ने लगे।

45-50 वर्षों के बाद स्थिति में बदलाव आया है। ऑर्डिनेंस फैक्टरियों के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां तालमेल बिठाने लगी हैं और विकास कर रही हैं। नागपुर में ही कई बड़ी कंपनियां स्थापित हो चुकीं हैं जो आज ग्लोबल प्लेयर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। वैश्विक कंपनियों ने भी विदर्भ का रुख किया है।

पिनाक से लेकर ड्रोन तक

इन ऑर्डिनेंस फैक्टरियों में पिनाक के गोला-बारूद, आरडीएक्स, टी-27, टी-90 के गोला-बारूद, बोफोर्स के गोला-बारूद बनाये जा रहे हैं। हाई कैलिबर 155, 130 एमएम बोर की गोलियां बनाई जा रही हैं। नागपुर में सभी के खोल बनाये जाते हैं जिसे बाद में चांदा भेजा जाता है। चांदा में इन खोलों पर बारूद भरा जाता है।

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इसके बाद इन्हें पुलगांव में स्टोर किया जाता है। भंडारा ऑर्डिनेंस फैक्टरी की भी अपनी अलग अहमियत है। वहां पर अलग उत्पाद बनाये जाते हैं। इन प्रक्रियाओं के लिए हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कम से कम शहरों में बढ़ाने, आबाद करने में भी इनका बड़ा योगदान है।

इकोनॉमी को मिला बूस्ट

जानकारों की मानें तो चांदा ऑर्डिनेंस फैक्टरी का टर्न ओवर ही अनुमानित लगभग 4000 करोड़ रुपये के आसपास है। भंडारा फैक्टरी का टर्नओवर लगभग 2000 करोड़ रुपये के आसपास है। नागपुर ऑर्डिनेंस फैक्टरी इस मामले में सबसे पीछे है। नागपुर का टर्नओवर 500-700 करोड़ के आसपास है। तीनों को मिला लें तो ये 3 कंपनियां भी विदर्भ की इकोनॉमी में 6500-7000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष योगदान कर रही हैं।

रोजगार के जरिए विकास

नई नीति के तहत इन तीनों कंपनियों में रोजगार भी बहुत बड़े पैमाने पर मिला हुआ है। चांदा में ही लगभग 4000-4500 लोग कार्यरत हैं। नागपुर में ऑर्डिनेंस फैक्टरी ने लगभग 2000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान किया है। इसी प्रकार भंडारा में 1500 से अधिक लोगों को रोजगार है। 3 कंपनियां 3 शहरों की रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। 7500-8000 प्रत्यक्ष कार्यरत हैं तो इससे दोगुनी संख्या में अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।

स्थानीय इकोनॉमी को बढ़ाने में इसका कोई हाथ नहीं पकड़ सकता। इसे और भी गति मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है क्योंकि पाइपलाइन में रिलायंस, दशा, सोलर सहित कई कंपनियां हजारों करोड़ निवेश करने जा रही हैं। इसके लिए सहायक कंपनियों को लाने में इस नीति से काफी लाभ मिलेगा।

Nagpur wardha amravati defense corridor maharashtra industrial policy 2026

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Published On: Jan 07, 2026 | 02:34 PM

Topics:  

  • Defence Sector
  • Maharashtra
  • Maharashtra Government
  • Nagpur

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