दंगे में आरोपी के भाई पर शिकंजा। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: औरंगजेब की कब्र को लेकर महल में हुई हिंसा और दंगे में अहेफाज अफसर खान को आरोपी बनाया गया और गणेशपेठ पुलिस में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। अब दंगे में आरोपी के भाई शाहबाज खान पर मनपा ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मनपा द्वारा मृत पिता के नाम पर मकान के निर्माण को अवैध करार देते हुए उसे गिराने के लिए नोटिस जारी किया गया।
इसे चुनौती देते हुए शाहबाज खान की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगले आदेश तक कोई तोड़फोड़ कार्रवाई नहीं करने के सख्त आदेश मनपा को दिए। शाहबाज की ओर से अधिवक्ता आकाश मून ने पैरवी की। उल्लेखनीय है कि एक ओर मनपा की ओर से दंगे के आरोपी के परिजनों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर हाई कोर्ट की ओर से लगातार कार्रवाई पर रोक लगाई जा रही है।
शाहबाज खान और अफसर खान के दिवंगत पिता का कलमना स्थित बिनाकी गृह निर्माण संस्था मर्यादित के लेआउट में लगभग 1000 वर्ग फीट क्षेत्र का प्लॉट है। प्लॉट पर याचिकाकर्ता के पिता ने 1+1 मकान बनाया है। इसके अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर लगभग 800 वर्ग फीट का निर्माण और पहली मंजिल पर लगभग 800 वर्ग फीट का निर्माण किया गया है। इसमें पूरा परिवार लगभग 8 वर्षों से रह रहा है।
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कहा गया कि 18 मार्च को शहर में हुए दंगे में कई धाराओं के तहत अहेफाज को झूठा फंसाया गया। वर्तमान में वह सेंट्रल जेल में बंद है। दंगे की कथित घटना और एफआईआर के बाद मनपा के स्थानीय अधिकारियों ने एमआरटीपी कानून के तहत विशेष रूप से नागपुर दंगे के संबंध में आरोपियों को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पूर्ण उल्लंघन करते हुए नोटिस जारी करना शुरू कर दिया।
अधिवक्ता आकाश मून ने कहा कि महानगर पालिका के 14 जोनल कार्यालय की ओर से याचिकाकर्ता को जारी नोटिस के अनुसार तुरंत प्रभाव से सम्पत्ति के दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर 24 घंटे के भीतर अनधिकृत निर्माण कार्य को तोड़ने की चेतावनी भी दी गई।
इसके जवाब में याचिकाकर्ता की ओर से सम्पूर्ण दस्तावेज पेश किए गए। साथ ही जवाब में कहा गया कि उनके मकान को ध्वस्त करने के लिए पक्षपातपूर्ण, अवैध और अनधिकृत कार्रवाई की जा रही है, कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही दुर्भावना से अधिकारों का अवैध प्रयोग किया जा रहा है। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने उक्त आदेश जारी किया।