संभाजीनगर जलापूर्ति योजना ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Scheme: छत्रपति संभाजीनगर पानी आपूर्ति योजना के कार्य में पाई गई गंभीर खामियों को लेकर प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद मुंबई उच्च न्यायालय का खंडपीठ सख्त रुख में नजर आया। अधूरे कार्यों के छायाचित्रों सहित साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय ने मनपा प्रशासन और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को जिम्मेदारी का एहसास कराया।
खामियां दूर किए बिना पानी आपूर्ति शुरू करने से न्यायालय ने स्पष्ट इनकार किया और अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत ऑनलाइन उपस्थित थे। उन्होंने प्रत्यक्ष निरीक्षण में पाई गई कमियों की जानकारी न्यायालय को दी। इसके बाद न्यायालय ने आयुक्त तथा महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे को 26 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए न्यायालय ने कहा कि यह योजना वर्ष 2050 की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई है, इसलिए जल्दबाजी में इसे शुरू करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि उद्भव कुए की सफाई अधूरी है और 2500 मिमी जलवाहिनी के कई स्थानों पर पैकिंग खराब है। 87 जोड़ों में से अनेक स्थानों पर रिसाव की आशंका है।
मनपा आयुक्त ने 100 से 150 कर्मचारियों की उपलब्धता और अग्निशमन दल की सहायता से सफाई अभियान चलाने की जानकारी दी। कंत्राटदार कंपनी ने 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा किया, जबकि शेष कार्य शीघ्र पूरा करने की बात कही।
हालांकि न्यायालय ने वास्तविक स्थिति और रिपोर्ट में अंतर होने पर चिंता जताई, सुनवाई में विजली कनेक्शन और आर्थिक भार का मुद्य भी उता। आयुक्त ने बताया कि तत्काल बिजली करार होने पर प्रति माह लगभग 4 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
यह भी पढ़ें:-21 फरवरी का इतिहास : जब लाहौर पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी
प्रत्येक जल पंप की लागत लगभग 7 करोड़ रुपये है और कुल 10 पंप प्रस्तावित है। न्यायालय ने सभी खामियां दूर कर विस्तृत जोखिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।