
नवभारत संवाद में पहुंचे स्टील एंड हार्डवेयर चैंबर ऑफ विदर्भ के सदस्य (फोटो नवभारत)
Steel Plant Skill Labour Shortage: एक समय था जब स्टील क्षेत्र में विदर्भ ही नहीं बल्कि पूरे मध्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग व ट्रेडिंग में नागपुर हेड करता था। यहां से काफी मात्रा में लोहा बाहर जाता था और यहां की छोटी-बड़ी मिलों का एक अच्छा काम और नाम था लेकिन इलेक्ट्रिसिटी की बढ़ी दरें और स्किल लेबर की कमी के साथ ही यूनियनबाजी ने यहां के स्टील प्लांट की पहचान को कम कर दिया। पहले यहां ग्रेट नाग रोड, हिंगना एमआईडीसी, स्मॉल इंडस्ट्रीज रोड पर करीब 30 से 40 रोलिंग मिलें हुआ करती थीं जिनमें अब कुछ ही बची हैं। कुछ छोटी रोलिंग मिलों के साथ अब यहां पर गिनती के ही बड़े स्टील प्लांट बचे हुए हैं।
आज सरकार इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है लेकिन वह यहां पर नहीं बल्कि गड़चिरोली में। इसका फायदा जरूर विदर्भ को होगा लेकिन देखें तो स्टील प्लांट एक जेब से दूसरे जेब में चले गये। जब मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग हुआ तो विदर्भ को भी अलग किये जाने की बात हुई थी लेकिन वह अलग नहीं हुआ।
छत्तीसगढ़ अलग होने से वहां का जो डेवलपमेंट हुआ उसी तरह का विकास भी विदर्भ में भी देखने मिलता। इससे नागपुर की रूपरेखा ही अलग होती। आज बड़े-बड़े प्लांट गड़चिरोली में जगह ले रहे हैं। वैसे बड़ी इंडस्ट्रीज आने से छोटी-छोटी इंडस्ट्रीज अपने आप आएंगी। आज यहां की इंडस्ट्रीज चलने के लिए यूनिटी होना बहुत जरूरी है। रॉ-मटेरियल तो रायगढ़, रायपुर से आ रहा है। मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में कोई समस्या नहीं है लेकिन पावर रेट सही रहे तो किसी तरह की समस्या ही न हो। यह कहना है स्टील एंड हार्डवेयर चैंबर ऑफ विदर्भ के सदस्यों का। वे ‘नवभारत’ द्वारा आयोजित संवाद में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर चैंबर के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सचिव मुकुल अग्रवाल, उपाध्यक्ष मनोज खेमानी, दिनेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सूर्यकांत अग्रवाल, सहसचिव मनीष जेजानी, समीर अग्रवाल, प्रतीक केडिया, राजिंदर सिंह कलसी व विनय डालमिया प्रमुखता से उपस्थित थे।
संजय अग्रवाल ने कहा कि आज हमारे यहां की बिजली की दरें इतनी ज्यादा हैं कि हम दूसरे राज्यों से कॉम्पिटिशन नहीं कर सकते। बढ़े हुए पावर रेट के कारण ही यहां के उद्योग का अस्तित्व खत्म होते जा रहा है। स्टील बिजनेस में नागपुर की जो पहचान पहले थी, अब वह नहीं है लेकिन अब गड़चिरोली में स्टील प्लांट आयेंगे तो इसका फायदा यहां पर ही होगा। सरकार को पावर रेट कम कर उद्योगों को राहत देना चाहिए।
मनोज खेमानी ने कहा कि पहले नागपुर डिस्ट्रीब्यूटर सेंटर था, वह अब नहीं रह गया। पहले यहां से 100 टन माल जाता था जो कि अब 50 टन ही रह गया। विदर्भ में जो इंडस्ट्रीज बंद हुईं उसका सबसे बड़ा कारण यहां पर रॉ-मटेरियल नहीं होना है। रॉ-मटेरियल हमें छत्तीसगढ़ से लाकर माल बनाना पड़ रहा था, जबकि अब गड़चिरोली में रॉ-मटेरियल से लेकर सबकुछ उपलब्ध है। इसका फायदा प्लांट्स को होगा।
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दिनेश अग्रवाल ने बताया कि इंफ्रा ग्रोथ के लिए नेताओं की मानसिकता बहुत जरूरी है। पुणे और नासिक के नेताओं की मानसिकता के कारण वे विदर्भ से पहले डेवलप हो गये। अब यहां पर सीएम देवेन्द्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के चलते 4 से 5 वर्षों में इंफ्रा डेवलपमेंट का कार्य शुरू हुआ है। किसी भी इंडस्ट्रीज के लिए डिमांड क्रिएट करना जरूरी है। इंडस्ट्रीज आएंगी तो विदर्भ का विकास होगा। इंफ्रा ग्रोथ से ही डिमांड बढ़ेगी।
विनय डालमिया ने बताया कि न्यू बुटीबोरी में आ रहे प्लांट के साथ ही गड़चिरोली में स्टील प्लांट को लेकर जो ख्वाब दिखाये जा रहे हैं, वे सच होने चाहिए। बस बलून फूटना नहीं चाहिए। यह घोषणाएं वास्तविक रूप से सामने आएंगी तो गड़चिरोली एक बड़ा स्टील हब बन जायेगा। वहां जो रॉ-मटेरियल है वह दुनिया में सबसे अच्छा है। वहां आएंगे तो बड़े प्लांट ही आएंगे, जिनके पास खुद के पावर प्लांट रहेंगे। फिर स्टील के रेट पंजाब से नहीं बल्कि गड़चिरोली से खुलेंगे।
राजिंदर सिंह कलसी ने कहा कि जो भी ग्रुप आ रहे हैं उनके पीछे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री गडकरी रहेंगे तो वे सभी सफल ही होंगे। बस यह देखना है कि कितने बड़े प्लांट आते हैं और इसमें कितना समय लगता है। यह प्लांट समय पर शुरू होंगे तो इनका फायदा विदर्भ के साथ नागपुर की छोटी-बड़ी इंडस्ट्रीज को भी होगा। आज देखा जाये तो यहां पर इतने इंफ्रा के कार्य चल रहे हैं उनमें नागपुर का नाममात्र का ही लोहा उपयोग किया जा रहा है।
प्रतीक केडिया ने बताया कि अन्य स्थानों की जगह यहां की जमीन काफी सस्ती है। बाहर के लोग आते हैं और जगह खरीदकर रख लेते हैं लेकिन उस पर कंपनी की शुरुआत नहीं करते। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। आज हम बॉर्डर फैंसिंग की जाली बनाते हैं जिसके लिए एमओयू भी किया हुआ है। विदर्भ में स्टील इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देना है तो सरकार को सपोर्ट करना बहुत ही जरूरी है।
मनीष जेजानी ने कहा कि यहां पर माथाड़ी लॉ काफी अधिक सख्त है। सरकार को इसे फ्रेंडली बनाना चाहिए। इससे वहीं यहां की इंडस्ट्रीज को स्थानीय स्किल्ड मैन पावर नहीं मिल पाता। अब भी हम लोगों को बिहार, ओडिशा, यूपी और एमपी से लेबर लाने पड़ते हैं तब जाकर यहां की इंडस्ट्रीज में काम होता है। सरकार को यह प्रयास करना होगा कि यहां की इंडस्ट्रीज को स्किल्ड लेबर मिले। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल पायेगा और इंडस्ट्रीज भी बढ़ेगी।
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मुकुल अग्रवाल ने बताया कि यहां के मार्केट में पहले जैसी ग्रोथ नहीं रही। यहां से डिस्ट्रीब्यूशन कम हो गया है। पहले यहां से जहां आसपास के जिलों में 100 टन से ज्यादा माल जाता था वह अब घटकर मात्र 50 टन ही रह गया। हर जिले में नेटवर्क डीलर बढ़ गया है। इसके चलते ग्राहक यहां से माल मंगाने की बजाय अपने स्थान से ही खरीद लेते हैं। यहां से लोहे की सेल डायवर्ट हो गई है।
सूर्यकांत अग्रवाल ने कहा कि बिजली की दरों के साथ सोलर प्लांट लगवाने में भी दिक्कत आती है। वहीं सीएसआर भी जबरदस्ती थोपा जाता है। एक तरफ सरकार व्यापारियों को सुनकर अधिकारियों से उनकी समस्या हल करने के लिए बोलती है लेकिन अधिकारी हैं कि उस पर अमल ही नहीं करते। इससे व्यापारियों का नुकसान होता है। इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। जब व्यापारियों की सुनवाई होगी तो कारोबार में बढ़ोतरी होगी।
समीर अग्रवाल ने कहा कि अब जमाना बदल रहा है। अभी प्री-इंजीनियर बिल्डिंग का कांसेप्ट आ गया है। पहले जहां स्टैंडर्ड लोहे का कार्य होता था, अब सॉफ्टवेयर आधारित कांसेप्ट आ गया है। अब इससे पता चलता है कि बिल्डिंग में कितनी थिकनेस का लोहा लगाना है और किस प्वाइंट पर लगाना है। यह एक आदर्श समकालीन संरचना है जो कि आगे का भविष्य है। वहीं गड़चिरोली में बड़े-बड़े प्लांट्स आ रहे हैं जिसका फायदा हम सभी को मिलेगा।






