
नागपुर न्यूज
Urban Issues in Nagpur Outskirts: आसपास के नगर परिषद क्षेत्रों बूटीबोरी, डिगडोह, कामठी, काटोल, वाडी और सावनेर, उमरेड में स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है। ये क्षेत्र नागपुर से लगे ‘सैटेलाइट’ सिटी के रूप में उभर रहे हैं लेकिन इन क्षेत्रों की एक अलग ही चुनौती है। एनआईटी, एनएमआरडी, जिला परिषद के हद में आने वाले इन क्षेत्रों में विकास की अनेक चुनौतियां हैं।
अब इन चुनौतियों को लेकर स्थानीय नेताओं को घेरा जाएगा और उनसे सवाल-जवाब किए जाएंगे। जिले के कई गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं हैं। घर, सड़क, पानी, बिजली जैसी दैनंदिन समस्याओं का सामना लोग कर रहे हैं।
क्षेत्रफल में नागपुर महानगरपालिका (मनपा) से छोटे होने के बावजूद ये कस्बे अब शहर जैसी ही शहरी समस्याओं का सामना कर रहे हैं जिनमें भीड़भाड़ वाली सड़कें, अनियोजित आवास, जल आपूर्ति का तनाव और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर अत्यधिक बोझ शामिल हैं।
शहरी समस्याएं : हिंगना के विधायक समीर मेघे ने कहा है कि ये क्षेत्र पूरी तरह से शहरी हो गए हैं, इसलिए यहां के मुद्दे ‘महानगरपालिका (मनपा)’ जैसे ही हैं, न कि खेती-संबंधी। मतदाता अब सिर्फ़ नियमित रखरखाव की बजाय नियोजित विकास, बेहतर जल निकासी (ड्रेनेज) और आधुनिक नागरिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
सड़क और यातायात : कामठी के एक निवासी ने शिकायत की है कि हमारी सड़कें मुश्किल से 2 वाहनों के गुजरने लायक हैं, फिर भी हर महीने नये हाउसिंग लेआउट बन रहे हैं।
परिवहन की कमी : बूटीबोरी और वाड़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में निवासियों की मुख्य चिंता ट्रैफ़िक जाम और खराब सार्वजनिक परिवहन है। यहां के छात्र और निवासी रोजाना शहर जाने के लिए निजी ऑटो या दोपहिया वाहनों पर निर्भर हैं क्योंकि बसों की आवाजाही सीमित है। वे एक एकीकृत परिवहन योजना की मांग कर रहे हैं।
प्रशासनिक अंतर : नगर परिषद और मनपा के बीच मुख्य अंतर उनकी प्रशासनिक संरचना और जनसंख्या आकार का है। एक नगर परिषद 25,000 से 3,00,000 की आबादी वाले कस्बों का प्रबंधन करती है, जबकि मनपा इससे अधिक आबादी वाले शहरों को संभालती है।
बढ़ता अंतर : नागपुर के आसपास तेजी से हुए शहरीकरण ने इस अंतर को धुंधला कर दिया है। आज कई नगर परिषदें कॉरपोरेशन स्तर की समस्याओं का प्रबंधन छोटे बजट और कम कर्मचारियों के साथ कर रही हैं।
अव्यवस्थित विस्तार : बूटीबोरी और कलमेश्वर-ब्राम्हणी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि और नागरिक योजना के बीच तालमेल की कमी साफ दिखती है। व्यापारियों का कहना है कि संकरी सड़कों पर नई दुकानें और गोदाम आ गए हैं जिससे जल निकासी न होने के कारण भारी बारिश के बाद इलाका डूब जाता है।
पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर जिले के विकास पर जोर देते हुए मेट्रो क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने घोषणा की है कि यात्रा की परेशानियों को कम करने के लिए एक एकीकृत परिवहन केंद्र बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर के केंद्र से 20 किमी के दायरे तक परिवहन नगर निगम द्वारा प्रदान किया जाएगा।
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उसके बाद यह एनएमआरडीए की ज़िम्मेदारी होगी। हम नई बसें उपलब्ध कराएंगे जो एकीकृत परिवहन केंद्रों तक चलेंगी और मेट्रो मार्गों के साथ समन्वय स्थापित करेंगी।
आवास की समस्या : बूटीबोरी, हिंगना और वाड़ी में सस्ते आवास की काफी बड़ी समस्या है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इन क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जितनी आवास बननी चाहिए थी, नहीं बन पाई है। लोगों को रहने के लिए हद से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इसी प्रकार बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव भी है।
अवैध निर्माण : संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में आज अवैध निर्माण एक चुनौती बन चुका है। ऐेसे गैर मंजूरी वाले क्षेत्र में क्षेत्र के नेता सुविधाएं उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे इलाकों में नेताओं को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।






