मनपा ने खोदी हुईं सड़कें की दुरुस्त, हाई कोर्ट में किया दावा तो अदालत ने मांगा हलफनामा
High Court: नागपुर सड़कों की दुर्दशा पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख। बिजली लाइन के लिए खोदी सड़कों को ठीक न करने पर मनपा से हलफनामा तलब, पुलिस स्टाफ बढ़ाने पर भी टिप्पणी।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Nagpur Potholes: नागपुर सिटी की सड़कों की दुर्दशा तथा गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर छपी खबरों पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित के रूप में स्वीकार किया था। याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मनपा की पैरवी कर रहे वकील ने बिजली वाहिनियों के लिए खोदी गईं सड़कों को पूर्ववत किए जाने का दावा किया।
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने गत आदेशों के अनुसार तथा इस संदर्भ में हलफनामा दायर करने का आदेश मनपा को दिया। उल्लेखनीय है कि इस जनहित याचिका पर गत सुनवाई के दौरान डॉ। देवतले की ओर से अर्जी दायर की गई थी जिसमें उनका मानना था कि एमएसईडीसीएल ने बिजली वाहिनियों के लिए जहां-तहां सड़कें खोद रखी हैं किंतु उन्हें पूर्ववत नहीं किया गया।
इस मुद्दे पर मनपा की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र अधि। राहिल मिर्जा ने कोर्ट को बताया कि गत आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है जिस पर कोर्ट ने इस संदर्भ में भी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया।
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कर्मचारी बढ़ाने की आवश्यकता
गत समय न्यायालय ने इस बात को रिकॉर्ड पर रखा था कि गृह विभाग ने जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकीकरण, जीवन शैली में बदलाव, अपराध करने के तरीके में बदलाव, सोशल मीडिया के प्रभाव, धार्मिक और राजनीतिक अपराधों में वृद्धि और प्रौद्योगिकी संबंधी आर्थिक अपराधों के दूरगामी प्रभावों को ध्यान में रखते हुए 25 अगस्त 2023 को महाराष्ट्र राज्य में प्रत्येक पुलिस स्टेशन की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया था।
कोर्ट ने ऐसे कई उदाहरणों पर गौर किया जहां पुलिस आयुक्तालयों और पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों ने कोर्ट के आदेशों जैसे कि SARFAESI अधिनियम के तहत आदेशों को लागू करने या अतिक्रमण हटाने के लिए कर्मचारी प्रदान करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की थी।
पुरानी और नई इकाइयों में भेदभाव नहीं
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि जीआर 25 अगस्त 2023 में कर्मचारी की आवश्यकता के जो कारण बताए गए हैं वे नए स्थापित और पहले से मौजूद पुलिस स्टेशनों पर समान रूप से लागू होते हैं। कोर्ट का मत था कि राज्य को कर्मचारी प्रदान करने के मामले में नए या पुराने पुलिस स्टेशनों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए था।
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कोर्ट को सूचित किया गया कि 25 अगस्त 2023 के जीआर को वर्तमान में एक नीतिगत निर्णय के रूप में राज्य सरकार द्वारा सक्रिय पुनर्विचार के अधीन रखा गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह नई नीति बनाते समय 2023 के जीआर में दर्ज विचारों के प्रति संवेदनशील रहे। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और यह न केवल एक वैधानिक कर्तव्य है बल्कि राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के तहत एक संवैधानिक जनादेश भी है।
