भूमि आवंटन मामले में हाई कोर्ट सख्त, नागपुर संपत्ति विवाद में याचिकाकर्ता को झटका; अनियमितताओं पर लगी मुहर

Nagpur Property Dispute: नागपुर में भूमि आवंटन मामले में हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर अनियमितताओं पर सख्त टिप्पणी की और याचिकाकर्ता पर 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
High Court Takes Strict Stance in Land Allotment Case; Petitioner Suffers Setback in Nagpur Property Dispute as Irregularities Are Upheld
नागपुर संपत्ति विवाद,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Land Allotment Case: नागपुर नया इंदौरा स्थित पुराने संपत्ति मकान नंबर 2931/1-2 से जुड़े आवंटन को लेकर व्यास को ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। प्रन्यास द्वारा किए गए इस भूमि आवंटन के मामले में न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने इस मामले में कई गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का खुलासा किया है तथा इसे 'कानून को प्रक्रिया का दुरुपयोग' करार देते हुए याचिकाकर्ता पर 21,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

बिना सुनवाई रद्द किया गया आवंटन

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से राहत की गुहार लगाते हुए दावा किया था कि उनकी मुवक्किल बहुत गरीब है और उसने बाहर से कर्ज लेकर एनआईटी में पैसे जमा किए थे। वकील का आरोप था कि एनआईटी ने 3 साल बाद बिना कोई कारण बताए, बिना कोई सुनवाई का मौका दिए आवंटन पत्र रद्द कर दिया और जमा की गई राशि पर कोई व्याज भी नहीं दिया।

अधिकारियों की मिलीभगत का शक और अदालत की फटकार अदालत ने स्पष्ट किया कि एनआईटी के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू होने के डर से ही यह आवंटन पत्र वापस लिया गया था।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अगर वे चाहें तो याचिकाकर्ता के खिलाफ भी जांच शुरू करवा सकते हैं। 19 जनवरी 2026 को पिछली याचिका (रिट याचिका 731/2022) के आदेशों और मामले के तथ्यों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने वर्तमान याचिका को पूरी तरह से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया।

अदालत में खुले फर्जीवाड़े के राज

नावालिग के नाम पर आवंटन अदालत ने बताया कि जब भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया गया था, तब याचिकाकर्ता एक नावातिम थी, जबकि नियम के अनुसार आवेदक का बालिग होना अनिवार्य था। इसके अलावा, यह आवेदन किसी स्वाभाविक अभिभावक के माध्यम से भी नहीं किया गया था।

भुगतान में हेराफेरी सबसे बड़ा खुलासा यह या कि आवंटन के लिए जो चेक एनआईटी में जमा किया गया था वह याचिकाकर्ता के बैंक

खाते का नहीं था। अदालत ने पाया कि यह चेक वास्तव में उसी आवंटन प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले एक अन्य स्थानीय प्रतिभागी द्वारा जारी

पुरानी लीज को रद्द किए बिना नया आवंटन अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि इसी जमीन का पिछला आवंटन जो लंबे समय पहले याचिकाकर्ता के पिता के नाम पर था, उसे औपचारिक रूप से रद्द किए बिना ही नए आवंटन के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।