तलवार की धार पर है OBC उम्मीदवारों की जीत, जिले के 17 नगर परिषद-नगर पंचायत में 50% से ऊपर है आरक्षण
OBC Reservation Issue: नागपुर में 27 नगर परिषद-नगर पंचायत में से 17 में आरक्षण सीमा 50% से अधिक। ओबीसी उम्मीदवारों की जीत पर मंडराया खतरा, सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 21 जनवरी को।
- Written By: प्रिया जैस
निकाय चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Elections: जिस तरह नागपुर जिला परिषद में ओबीसी आरक्षण पर फैसला नहीं आने के चलते 16 सदस्यों की सदस्यता अदालत ने रद्द कर दी थी। उसके बाद रद्द सीटों पर ओपन वर्ग से दोबारा चुनाव करवाने पड़े थे। ठीक वैसी ही स्थिति नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव परिणाम आने के बाद ओबीसी के उम्मीदवारों के लिए बन सकती है।
दरअसल अब ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत तो 27 फीसदी कर दिया गया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की शर्त यह भी है कि कुल आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से किसी भी सूरत में अधिक नहीं होनी चाहिए। नागपुर जिले में 27 नप-नपं में 2 दिसंबर को मतदान होगा और परिणाम 3 दिसंबर को आएगा।
आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक
27 में से 17 नगर परिषद-नगर पंचायत में विविध वर्ग के आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक हो गई है। ऐसे में ओबीसी वर्ग की विजयी उम्मीदवारों की जीत पर ही सदस्यता रद्द होने की तलवार लटकी रहेगी। सुको में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होनी है और तभी स्थिति स्पष्ट होगी। बताते चलें कि जिले की 8 नगर पंचायतों व 9 नगर परिषदों में आरक्षण 50 प्रतिशत अधिक पहुंच गया है।
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जिला परिषद में ओपन शामिल की गई थी सीटें
इसके पहले भी जिला परिषद और पंचायत समिति के मामले में आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर चला गया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए नई चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे। उस समय सभी सीटों को सामान्य प्रवर्ग में शामिल किया गया था।
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बाद में राज्य सरकार ने कानून में संशोधन भी किया था। जिन-जिन सीटों में 50 फीसदी की सीमा पार हुई है वहां अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन रहते हुए चुनाव कराने के आदेश दिए गए हैं, इसीलिए ओबीसी वर्ग से विजयी होने वाले उम्मीदवारों पर पद गंवाने का खतरा बना रहेगा।
