RO ATM प्लांट बना शो पीस, 3 साल से पड़ा बंद, जलालखेड़ा में खारा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

RO Water ATM: जलालखेड़ा में सरकार की लाखों की लागत से लगाए गए दोनों RO वॉटर एटीएम प्लांट तीन साल से बंद। ग्रामीण खारा व दूषित पानी पीने को मजबूर, स्वास्थ्य पर भारी संकट।
RO Water ATM: जलालखेड़ा में सरकार की लाखों की लागत से लगाए गए दोनों RO वॉटर एटीएम प्लांट तीन साल से बंद। ग्रामीण खारा व दूषित पानी पीने को मजबूर, स्वास्थ्य पर भारी संकट।
RO वॉटर प्लांट (सौजन्य-नवभारत)
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Jalalkheda RO ATM News: गांव में दूषित व खारा पानी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। ऐसे में ग्रामीण भागों में रहने वाले लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल सके इसके लिए गांव-गांव में आरओ वॉटर एटीएम मशीनें लगाई गई। लेकिन, जलालखेड़ा ग्रामपंचायत से लेकर प्रशासन तक किसी को इसकी चिंता नहीं दिख रही। सरकार की योजनाओं के तहत लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए दो आरओ एटीएम प्लांट लगाये गए थे।

पिछले तीन साल से बंद पड़े हैं। हालत यह है कि ग्रामपंचायत कार्यालय के सामने लगाया गया आरओ प्लांट कुछ ही दिनों तक चालू रहा और फिर बंद होकर केवल शो पिस बनकर रह गया। इसी योजना के तहत जलालखेड़ा तहसील कार्यालय के पास लगाया गया।

उद्घाटन के बाद भी नहीं हुआ शुरू

दूसरा आरओ प्लांट भी फरवरी 2024 में पूर्व गृहमंत्री व विधायक अनिल देशमुख द्वारा उद्घाटन के बाद से आज तक शुरू नहीं हो सका। दोनों प्लांट बंद पड़े होने से लाखों रुपये की सरकारी निधि पानी में व्यर्थ गई और ग्रामीणों को अब भी खारा, अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रापं परिसर में ही गंदगी, तो गांव कैसे रहेगा साफ

आश्चर्य यह है कि जिस आरओ प्लांट से गांव को स्वच्छ पानी मिलना था, उसके आसपास तक साफ-सफाई नहीं है। कचरा, गंदगी और उपेक्षा साफ दिखती है। जब ग्रापं परिसर की स्थिति ऐसी हो, तो पूरे गांव में सफाई व्यवस्था का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।

3 साल से बंद प्लांट बना बड़ा सवाल

ग्रापं के दावों में विकास का शोर तो है, लेकिन गांव की सबसे बुनियादी जरूरत पीने का साफ पानी आज भी पूरी नहीं हो पा रही है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि विकास कैसा, जब आरओ प्लांट तीन साल में भी चालू नहीं किए जा सके? ग्रामपंचायत का कार्यकाल खत्म होने में मात्र कुछ ही दिन बचे हैं।

इस बीच 15वें वित्त आयोग की निधि से लाखों रुपये की खरीदारी धड़ाधड़ की जा रही है। सफाई के लिए कूड़ेदान, उपकरण आदि खरीदे जा रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर बंद पड़े आरओ प्लांट की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीण कहते हैं कि यदि कूड़ेदान खरीदे जा सकते हैं, तो गांव की सेहत बचाने वाले आरओ प्लांट क्यों नहीं?

गांव में पानी की समस्या जस का तस

तीन साल से बंद आरओ प्लांट, खारे पानी की समस्या और सफाई व्यवस्था की दुर्दशा, यह सब मिलकर साफ दिखाता है कि जलालखेड़ा में विकास सिर्फ कागजों पर है, जमीन पर नहीं। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिलना, यह ग्रापं प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है।

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