विकास ठाकरे और पूर्व मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation Scam: नागपुर महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत चौधरी का भले ही बुधवार को तबादला हुआ हो लेकिन उनके कार्यकाल में हुए कई कार्यों को लेकर अब विधानसभा में मुद्दा उठाए जाने से मामला गरमा गया है। पश्चिम नागपुर के विधायक और नागपुर शहर (जिला) कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विकास ठाकरे ने मनपा प्रशासक डॉ. अभिजीत चौधरी के कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
विधानसभा में बोलते हुए ठाकरे ने मांग की कि प्रशासक के कार्यकाल में मंजूर और पूरे किए गए सभी कार्यों की ‘खेल घोटाले’ (क्रीड़ा घोटाला) की तर्ज पर सघन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
विकास ठाकरे ने सदन में स्पष्ट किया कि डॉ. अभिजीत चौधरी का तबादला हो जाने मात्र से उन्हें उनके कार्यकाल के दौरान हुई नियमों के उल्लंघन और अनियमितताओं से राहत नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि प्रशासकीय काल के दौरान लिए गए कई निर्णयों और किए गए कार्यों पर गंभीर संदेह है जिसकी निष्पक्ष जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
विधायक विकास ठाकरे ने एमएसआईडीसी द्वारा झुड़पी जंगल के लिए आरक्षित भूमि पर बनाए जा रहे प्रदर्शनी केंद्र के काम में भी भारी अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार ऐसी भूमि को वन भूमि माना जाता है, फिर भी वहां परियोजना शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने एमएसआरटीसी से संबंधित एक बड़े वित्तीय घोटाले का भी पर्दाफाश किया जिससे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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ठाकरे ने गोरेवाड़ा और बोरगांव के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मकोका लगाए जाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मकोका जैसे कड़े कानून का इस्तेमाल संगठित अपराध करने वाले गिरोहों के खिलाफ होना चाहिए लेकिन पुलिस ने उन व्यक्तियों पर यह कानून थोप दिया है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और न ही वे किसी गिरोह का हिस्सा रहे हैं। ठाकरे ने सरकार से इन सभी मामलों की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।