नितिन गडकरी और विकास ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Election 2026: मनपा चुनाव इस बार कुछ अलग होने वाला है। भाजपा के लिए कांग्रेस की चुनौती हल्की नहीं रहने वाली है। वह पूरे जोश-ओ- खरोश के साथ 100 प्लस सीटों का टारगेट लेकर आगे बढ़ रही है। वहीं बीजेपी ने 120 प्लस का टारगेट रखा है। कांग्रेस की कमान स्वाभाविक रूप से शहर अध्यक्ष व विधायक विकास ठाकरे के हाथों में है।
वहीं बीजेपी स्वाभाविक तौर पर अपने वजनदार नेता नितिन गडकरी के विकास कार्यों के भरोसे। हालांकि सीएम देवेंद्र फडणवीस अपने गृहनगर में जोर लगाएंगे ही लेकिन उन्हें संपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी देखनी है। ऐसे में गडकरी ही मुख्य तौर पर नागपुर की धुरा संभालेंगे। ऐसे में इस चुनाव में फिर लोकसभा चुनाव की तरह मुकाबला गडकरी वर्सेस ठाकरे हो गया है।
बता दें कि लोस चुनाव में ठाकरे ने गडकरी को ऐतिहासिक टक्कर दी थी। उनकी जीत का अंतर काफी कम कर दिया था। 2019 के चुनाव में गडकरी ने नाना पटोले को 2,16,009 वोटों से हराया था। ठाकरे ने उनकी लीड 78,406 वोटों से कम कर दी थी। गडकरी को 6,55,027 वोट हासिल हुए थे जबकि ठाकरे को 5,17,424 वोट मिले थे। भले ही लोकसभा व मनपा चुनाव का समीकरण अलग होता है लेकिन ठाकरे ने जनता के बीच जो पैठ बनाई है उसका असर इस चुनाव में भी देखने को मिलेगा।
शहर कांग्रेस ने पहले ही मन बना लिया था कि यहां सभी 151 सीटों पर उसके अपने ही उम्मीदवार खड़े किए जाएंगे। ठाकरे ने कई बार कार्यकर्ताओं की भावनाएं प्रदेश व राष्ट्रीय नेताओं तक पहुंचाया था। अंतिम समय तक सहयोगी दलों से गठबंधन की चर्चाएं तो चलती रहीं लेकिन फिर उसने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। जो सूची जारी की गई उसमें युवा, प्रतिभाशाली, जुझारू नये चेहरों को इस बार मौका दिया गया है।
अन्यथा अब तक सिटिंग पार्षदों की टिकट काटने की परंपरा कांग्रेस में नहीं देखी गई थी, जब तक कि कोई बड़ा कारण न हो। अनेक सीनियर्स के टिकट काटे गए। बावजूद इसके सूची घोषित होने के बाद पार्टी में किसी तरह का सिर फुटव्वल या अंदरूनी झगड़े सामने नहीं आए।
ठाकरे ने सभी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लेकर उम्मीदवारों की सूची तैयार की जबकि दूसरी पार्टियों में नाम कटने से गुस्सा सार्वजनिक हुआ। ठाकरे की रणनीति इस चुनाव में मनपा में वापसी की है और इसके लिए वे बीजेपी के 15 वर्षों के शासन से पनपी एंटी इनकम्बेंसी और प्रशासक राज के दौरान जनता को हुईं परेशानियों को भुनाते हुए सफलता हासिल करने की है।
यह भी सच है कि बीजेपी हर चुनाव में सबसे अधिक प्रयोग करती है। उसे भी नागपुर की जनता के मूड की भनक है। एंटी इनकम्बेंसी स्वाभाविक व्यवहार है जिसकी काट के लिए उसने अपने 63 सिटिंग नगरसेवकों को बदल डाला है। बीजेपी नहीं चाहती कि पूर्व नगरसेवकों पर जनता का गुस्सा निकले या फिर पुराने चेहरे देख वोटर्स डायवर्ट हो जाएं।
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पूरी तरह प्रैक्टिकल होते हुए गडकरी व फडणवीस ने उम्मीदवारों की सूची तैयार करते समय कड़े निर्णय लिये। जनता के बीच नये चेहरों के साथ अपनी सरकार के विकास कार्यों व आगामी विकास विजन को लेकर मैदान में उतरे हैं।
गडकरी ही चुनाव सभाओं में अधिक नजर आएंगे। यह उनके गढ़ की प्रतिष्ठा का सवाल भी है। बीते सारे चुनाव के साथ ही हाल ही में हुए नगर परिषद व नगर पंचायत चुनावों में राज्य भर में मिली भारी जीत से बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भी है।
हमेशा चुनाव मोड में रहने वाली बीजेपी से इस चुनाव में उम्मीदवार तय करने में ऊहापोह की स्थिति अंतिम समय तक बनी रही जिसके चलते 6 सीटों पर 2-2 उम्मीदवारों को पार्टी का एबी फार्म दे दिया गया। ऐसा कभी कांग्रेस में हुआ करता था लेकिन अनुशासित समझी जाने वाली भाजपा में अंतिम समय तक उम्मीदवार के नाम फाइनल नहीं हो पाये तो इसे आश्चर्यजनक समझा जा रहा है।
अब जिन 12 उम्मीदवारों ने एबी फार्म नामांकन के साथ जमा किया है उनमें से किन 6 के नाम वापस करवाए जा सकेंगे, इस पर मंथन चल रहा है। पार्टी के चुनाव प्रभारी का कहना है कि बैठक कर निर्णय लेंगे और किसी को नाराज नहीं करेंगे। वैसे जिन 63 पूर्व नगरसेवकों की टिकट काटी गई है उनमें भारी रोष देखा जा रहा है। यह नाराजगी भले ही सार्वजनिक नहीं हो रही है लेकिन चुनाव में पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।