minority certificate controversy (सोर्सः सोशल मीडिया)
Minority Certificate Controversy: राकां (अजीत पवार) पार्टी के नेता और कैबिनेट मंत्री नरहरी झिरवल के मंत्रालय स्थित कार्यालय में रिश्वतखोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसी बीच दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के अधीनस्थ अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों की हरकत से पूरे मंत्रालय के अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। 28 जनवरी को बारामती प्लेन क्रैश की घटना में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की दर्दनाक मृत्यु के कारण जब पूरा राज्य शोक मना रहा था, उसी दौरान मंत्रालय में उनके अधीन काम करने वाले अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारी विचाराधीन फाइलों को तेजी से मंजूरी देने में व्यस्त थे।
सुबह 8:45 बजे बारामती में विमान क्रैश होने के बाद पूरे राज्य में एक दिन (28 जनवरी) का अवकाश और तीन दिन का शोक घोषित किया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने फाइलों को मंजूरी दी। हैरानी की बात यह है कि पहली फाइल 28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे पास की गई, जबकि उस दिन सामान्य प्रशासन विभाग ने सुबह ही सभी सरकारी कार्यालय बंद करने के निर्देश जारी कर दिए थे।
राज्य सरकार ने 28, 29, 30 जनवरी और 2 फरवरी को कुल 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया। इनमें से कुछ प्रमाण पत्र कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद शाम 6:45 और 6:58 बजे भी जारी किए गए। 1 फरवरी रविवार होने की वजह से कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।
29 जनवरी को अकेले पोदार इंटरनेशनल स्कूल की 25 शाखाओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। इसी तरह सेंट जेवियर्स संस्था की 5 स्कूलों को भी अल्पसंख्यक का दर्जा मिला। स्वामी शांति प्रकाश और देवप्रकाश संस्था की 4 स्कूलों को भी प्रमाण पत्र दिए गए। इसके अलावा श्री माता कन्यका सेवा संस्था और सेवादास महाराज शिक्षण प्रसारक मंडल, यवतमाल सहित कई अन्य संस्थाओं को भी यह दर्जा प्रदान किया गया।
इन शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया अगस्त 2025 से ही स्थगित थी। खबरों के अनुसार, कुछ संस्थानों के प्रमाण पत्रों को पहले मंत्री माणिकराव कोकाटे, मंत्री दत्तात्रय भरणे और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने रोक रखा था। अजीत पवार के निधन के बाद इन फाइलों को अचानक मंजूरी दे दी गई।
अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से शैक्षणिक संस्थानों को कई विशेष रियायतें और अधिकार मिल जाते हैं। इन स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू नहीं होता, जिससे 25% गरीब बच्चों को मुफ्त प्रवेश देने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। इन संस्थानों को शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति में विशेष छूट मिलती है। ऐसे स्कूलों में शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य नहीं होती। ये संस्थान सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में भी नहीं आते। साथ ही, इन्हें करोड़ों रुपये के दान और अनुदान लेने की छूट मिलती है और विद्यार्थियों की संख्या का कोई बंधन नहीं होता।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सीधे मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा, “अजीत का प्रशासन पर मजबूत नियंत्रण था। उनके निधन के कुछ घंटों के भीतर ही ऐसा कृत्य होना बेहद शर्मनाक है। यह ‘चिता की आग पर रोटी सेंकने’ जैसा है। यह किसके इशारे पर हुआ? इसकी पूरी जिम्मेदारी देवेंद्र फडणवीस को लेनी चाहिए और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”
ये भी पढ़े: मुलुंड मेट्रो हादसे पर भड़के एकनाथ शिंदे, इंजीनियर सस्पेंड, मृतक व घायलों के लिए किया मुआवजे का ऐलान
मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने वितरित किए गए सभी 75 अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाण पत्रों पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य वसीम बुरहान ने उपमुख्यमंत्री एवं अल्पसंख्यक मंत्री सुनेत्रा पवार को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में मांग की है कि इस पूरी घटना की जांच की जाए और जांच पूरी होने तक इन संस्थानों का माइनॉरिटी स्टेटस सस्पेंड कर दिया जाए।
उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा अजीत पवार ने शुक्रवार को विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने स्कूलों को गलत ढंग से अल्पसंख्यक दर्ज प्रमाण पत्र वितरित किए जाने की विस्तृत जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजीत के दिखाए रास्ते के अनुसार विभाग का कामकाज होना चाहिए।