
कांग्रेस गटनेता का चयन (सौजन्य-नवभारत)
Leader of Opposition NMC: नागपुर महानगरपालिका में अपनी संगठनात्मक शक्ति और रणनीतिक एकजुटता का परिचय देते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘नागपुर महाविकास आघाड़ी’ का पंजीकरण सबसे पहले विभागीय आयुक्त कार्यालय में कराया है। इस कदम के साथ ही कांग्रेस मनपा में पंजीकरण कराने वाला पहला प्रमुख राजनीतिक दल बन गया है।
जिसमें पार्टी की स्पष्ट दिशा और एकजुटता का परिचय दिया गया। यहां तक कि हमेशा से गुटबाजी का दंश झेलने वाली कांग्रेस ने इस बार किसी भी विरोध या गुटबाजी और पार्षदों की सर्वसम्मति से पार्षद संजय महाकालकर को गुट नेता के रूप में नियुक्त भी किया।
पार्टी के सभी 34 नगरसेवकों ने एकजुट होकर चौथी बार के अनुभवी नगरसेवक संजय महाकालकर को सर्वसम्मति से अपना ‘गट नेता’ चुना है। इस चयन प्रक्रिया में प्रभाग क्रमांक-14 के नगरसेवक अभिजीत झा ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि प्रभाग क्रमांक-10 के नगरसेवक प्रमोद सिंह ठाकुर ने इसका अनुमोदन किया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस निर्णय को तत्काल अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है जिसमें पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया होने का उदाहरण उजागर किया गया।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो संभवत: यह पहला अवसर होगा जब कांग्रेस में किसी पद के लिए कोई भी टकराव दिखाई नहीं दिया है। चंद्रपुर जैसी महानगरपालिका में जहां कुछ वरिष्ठ नेताओं में टकराव दिखाई दिया वहीं नागपुर में न केवल कांग्रेस के पार्षदों बल्कि नेताओं में भी एक राह दिखाई दी। पार्षदों में एक राह होने के कारण मनपा की सभा में विपक्ष के रूप में पार्टी की ताकत देखने को मिल सकती है।
नेताओं का मानना है कि चुनाव के बाद भी कांग्रेस के नगरसेवकों और कार्यकर्ताओं में यह अटूट एकता नागपुर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस अवसर पर नागपुर शहर (जिला) कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व विधायक विकास ठाकरे, विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी, गिरीश पांडव, कुणाल राऊत, केतन ठाकरे और अतुल कोटेचा सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
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कांग्रेस नेतृत्व ने विश्वास व्यक्त किया है कि ‘नागपुर महाविकास आघाड़ी’ आने वाले समय में और अधिक व्यापक और प्रभावी होगी। पार्टी के अनुसार, कई अन्य धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों के नगरसेवक भी कांग्रेस के साथ आने के इच्छुक हैं। दक्षिण नागपुर के प्रभाग 30‘ब’ से चुनकर आए संजय महाकालकर चौथी बार मनपा में पहुंचे हैं। वर्ष 2002 में पहली बार पार्षद बने थे।
हालांकि वर्ष 2007 के चुनाव में काफी कम अंतर से हार झेलनी पड़ी थी किंतु उसके बाद 2012 में फिर से जीत दर्ज कर दूसरी बार मनपा पहुंचे। इसी तरह से वर्ष 2017 में भी जीत दर्ज की। अब चौथी बार मनपा में दस्तक दी है। वर्ष 2017 में उन्हें गट नेता और विपक्ष नेता के रूप में मौका तो मिला था किंतु पार्टी अंतर्गत विवाद के चलते बाद में पद छोड़ना पड़ा था। अब फिर से एक बार उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में कमान सौंपी गई है।






