दमदार दलों में भी उम्मीदवारी को लेकर भगदड़ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Election: खुद को अजेय बताने वाली पार्टी से लेकर सत्ता पर काबिज दलों और मजबूत विपक्षी पार्टियों में निकाय चुनाव के पहले ही चरण में जिस तरह की भगदड़ देखने को मिली है, उसने उनके बड़े-बड़े दावों की हकीकत सामने ला दी है। जीत सकने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के लिए सत्ताधारी दलों ने ही एक-दूसरे के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महायुति में शामिल तीनों दलों में सबसे ज्यादा भगदड़ मची। शिंदे सेना ने भाजपा के कई उम्मीदवारों को अपने पाले में किया, तो राष्ट्रवादी ने भी भाजपा के दावेदारों को तोड़ा। इसका असर मुंबई तक पहुंचा।
मंगलवार की कैबिनेट बैठक में इसी मुद्दे पर नाराज होकर शिंदे सेना के मंत्रियों ने बैठक का बहिष्कार किया। बाद में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्होंने अपनी नाराज़गी जताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें उनका ही आईना दिखाया। नागपुर जिले में भी ऐसी ही भगदड़ देखने को मिली, जहां कहीं का कार्यकर्ता कहीं का उम्मीदवार बन गया। इससे कार्यकर्ता परेशान और मतदाता पूरी तरह भ्रमित हैं।
जिले में पहली बार भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों को भी उम्मीदवार ‘आयात’ करने या दूसरों के उम्मीदवार तोड़ने पड़े। इससे मतदाता इन दलों की ताकत और उनके दावों पर सवाल उठाने लगे हैं। कार्यकर्ता भी इस उलझन में हैं कि कल तक साथ खड़े रहने वाले नेताओं का समर्थन करें या नहीं। जिले में किस तरह से तोड़फोड़ हुई और एक-दूसरे के घर पर सेंध लगाई गई, इसके कुछ उदाहरण चौंकाने वाले हैं।
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