साथियों के लिए सीटें छोड़ने के मूड में नहीं बीजेपी, सहयोगी दल लगा रहे टाइमपास करने का आरोप
Mahayuti Alliance Crisis: नागपुर मनपा चुनाव से पहले महायुति में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है, जहां भाजपा पर सहयोगी दलों के लिए सीटें न छोड़ने और टाइमपास करने के आरोप लग रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
नागपुर मनपा चुनाव, (प्रतीकात्मक चुनाव)
Nagpur Municipal Election: मनपा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि में अब केवल चार दिन शेष रह गए हैं, लेकिन राज्य में सत्ताधारी दलों के बीच महायुति को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हो सकी है। नागपुर में स्थिति और भी उलझी हुई नजर आ रही है। 15 वर्षों तक मनपा की सत्ता संभाल चुकी भाजपा ने यहां केवल शिंदे गुट की शिवसेना से बातचीत की है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) से अब तक औपचारिक चर्चा तक नहीं की गई है।
भाजपा के नेता भले ही दावा कर रहे हों कि नागपुर सहित विदर्भ की चारों मनपा में महायुति मिलकर चुनाव लड़ेगी, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं। नागपुर में तो भाजपा ने लगभग राकां को दरकिनार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को राकां के नागपुर चुनाव निरीक्षक बैठक के लिए शहर में मौजूद थे, लेकिन शिंदे शिवसेना के साथ बैठक के बाद भाजपा की बैठक आधी रात तक चलती रही और राकां निरीक्षक इंतजार करते ही रह गए। शनिवार को भी चर्चा के लिए कोई न्योता नहीं मिला। इससे नाराज सहयोगी दलों के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि भाजपा सीटें छोड़ने के मूड में नहीं है और जानबूझकर समय काट रही है।
120 सीटों का लक्ष्य बना रही भाजपा
वर्तमान मनपा में भाजपा के 108 नगरसेवक थे। इस बार पार्टी ने 120 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा को कम से कम 130 से 135 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने होंगे। यही कारण माना जा रहा है कि भाजपा सहयोगी दलों को अपेक्षित तवज्जो नहीं दे रही है। यदि भाजपा 130 सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो शिंदे शिवसेना और राकां अजीत पवार गुट के लिए कुल मिलाकर केवल 20-25 सीटें ही बचेंगी, जिस पर दोनों दलों का सहमत होना मुश्किल है।
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भाजपा महायुति में शामिल शिंदे शिवसेना को ही प्राथमिकता देती नजर आ रही है। शिंदे गुट ने शुरुआत में 50 सीटों की मांग की थी, जो अब घटकर 25 तक आ गई है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा यदि 15 सीटें भी छोड़ती है तो इसे बड़ी रियायत माना जाएगा। फिलहाल नागपुर में भाजपा और शिंदे शिवसेना के मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति बन चुकी है।
राकां स्वतंत्र तैयारी में, घोषणा का इंतजार
इधर, महायुति में शामिल राकां अजीत पवार गुट ने भाजपा के अब तक के रवैये को देखते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रशांत पवार ने बताया कि शहर में राकां की ताकत लगातार बढ़ रही है और जनता का अच्छा समर्थन मिल रहा है। नागपुर मनपा को लेकर भाजपा से अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यदि एक-दो दिन में गठबंधन को लेकर कोई निर्णय नहीं होता, तो पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।
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वहीं राकां के कार्याध्यक्ष श्रीकांत शिवणकर ने बताया कि अब तक 350 इच्छुक उम्मीदवारों के इंटरव्यू हो चुके हैं और प्रक्रिया जारी है। गठबंधन की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन यदि समय रहते फैसला नहीं हुआ तो पार्टी स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
