प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation Election: नागपुर मनपा में मार्च 2022 के बाद से चुनाव लंबित है। करीब-करीब 4 वर्षों के इंतजार के बाद अब आगे बढ़ी चुनावी प्रक्रिया के बाद हाल ही में सीटों के लिए आरक्षण तो निकाला गया किंतु पहली बार इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों में उस तरह का उत्साह दिखाई नहीं दिया है। यहां तक कि अब आरक्षण पर आपत्ति और सुझावों की शुरू हुई प्रक्रिया में पहले दिन सोमवार को न तो मनपा मुख्यालय और न ही किसी जोन में कोई आपत्ति दर्ज कराई गई।
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार 24 तक आपत्तियां और सुझाव मंगाए गए हैं जिसके बाद प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई कर आरक्षण को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जानकारों की मानें तो आरक्षण की प्रक्रिया में ही स्थानीय नेताओं को किसी तरह की रुचि नहीं रही है जिससे आरक्षण प्रक्रिया के दौरान उनकी अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से देखी गई। चूंकि प्रक्रिया ही देखी नहीं गई तो ऐसे में आपत्ति दर्ज कराने का मसला ही दिखाई नहीं दे रहा है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो महिलाओं के लिए निकाले गए आरक्षण में प्रत्येक प्रभाग में एक सीट सामान्य खुले वर्ग के लिए आरक्षित है। जिन प्रभागों में पूर्व पार्षदों की पहले की सीट खतरे में पड़ी है उनकी ओर से उसी प्रभाग के अन्य हिस्से से लड़ने का मानस बनाया जा चुका है।
पूर्व पार्षदों की मानें तो उनकी ओर से प्रभाग के किसी एक हिस्से का प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि पूरे प्रभाग का प्रतिनिधित्व किया जाता है। ऐसे में यदि अ,ब,क,ड में प्रभाग के 4 वार्ड में से कोई वार्ड आरक्षित भी हुआ हो तो दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ा जा सकता है।
वैसे भी राजनीतिक दलों की ओर से एक प्रभाग में 4 प्रत्याशियों को टिकट दिया जाना है। फिर वह किसी भी वार्ड से हो। इसी तर्क के साथ कई पूर्व पार्षदों द्वारा जुगाड़ तंत्र अपनाया जा रहा है।
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राजनीतिक जानकारों की मानें तो अब कुछ पूर्व पार्षदों द्वारा पार्टी से अधिक स्वयं की लोकप्रियता का हवाला दिया जा रहा है। पहले जीत दर्ज कर चुके पार्षदों का मानना है कि पार्टी ने उनकी जीत की संभावना के चलते ही पहले भी टिकट दिया था। ऐसे में यदि पार्टी को सीट निकालकर मनपा में बहुमत हासिल करना हो तो उन्हें टिकट देना होगा।
लगभग 4 वर्षों से मनपा बिना सत्ता के है। ऐसे में लोगों में उनके प्रति कुछ विरोध होना स्वाभाविक है। इस तर्ज पर उनका टिकट काटना मुनासिब नहीं होगा। हालांकि पार्टी के खिलाफ निर्दलीय लड़ने से इन पार्षदों ने इनकार तो किया किंतु दूसरों को टिकट मिलने पर पूरे दमखम से दूसरों का प्रचार करने से इनकार भी किया।