
विजय वडेट्टीवार (सौजन्य-एक्स)
Maharashtra Politics News: राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में महापौर पद के लिए घोषित आरक्षण ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। गुरुवार को मनपा के महापौर पद को इस वर्ष ‘सामान्य वर्ग की महिला’ के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरक्षण प्रक्रिया को ही संदिग्ध बताया है।
विजय वडेट्टीवार ने कहा कि महापौर पद के लिए लॉटरी पारदर्शी नहीं है बल्कि ‘मैच फिक्सिंग’ है। नागपुर के लिए आरक्षण निकालते समय एक खास नाम पहले से ही तय था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की करीबी सहयोगी शिवानी दाणी को महापौर बनाने के लिए यह सुविधाजनक आरक्षण किया गया। नागपुर में पिछले 25 वर्षों में महापौर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं किया गया है।
उम्मीद थी कि कम से कम इस साल तो यह उपलब्ध होगा लेकिन फिर से खुली श्रेणी के लिए लॉटरी निकालकर संदेह और बढ़ा दिया गया है। कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया कि आरक्षण की घोषणा पार्टी की सुविधा के अनुसार केवल उन्हीं महानगरपालिकाओं में की गई है जहां भाजपा का बहुमत है।
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विजय वडेट्टीवार ने आगे कहा कि मनसे, भाजपा की ‘बी’ टीम है। भाजपा-कांग्रेस गठबंधन का सपना देखना हास्यास्पद है। भारतीय जनता पार्टी और एआईएमआईएम के बीच पर्दे के पीछे साजिश चल रही है। राज्य सरकार का ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि महापौर आरक्षण को लेकर विवाद राजनीतिक आरोपों तक ही सीमित रहेगा या मामला अदालत तक पहुंचेगा।






