पर्यावरण से खिलवाड़! 5,771 पेड़ काटने के बाद कंपनी ने नहीं लगाया एक भी पौधा, हाई कोर्ट ने मनपा को घेरा
London Street Nagpur High Court: लंदन स्ट्रीट प्रोजेक्ट को लेकर 5,771 पेड़ लगाने के आदेश की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त। ठेकेदार का अब 10,000 पेड़ लगाने का दावा, मनपा से मांगा जवाब।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Nagpur High Court PIL: नागपुर में हाई कोर्ट ने खामला क्षेत्र में ‘लंदन स्ट्रीट रोड’ (स्नेहा संवर्धक रोड से जयताला रोड तक) पर बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया। उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता ज्ञानदीप भोंगाडे द्वारा 17 जनवरी 2026 को अदालत को पत्र भेजा गया था।
शिकायत में यह सामने आया कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बावजूद किसी भी प्राधिकरण या कंपनी द्वारा आसपास के क्षेत्र में एक भी नया पेड़ नहीं लगाया गया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत मित्र की ओर से बताया गया कि ठेकेदार कम्पनी को लगभग 2 साल 9 महीने पहले 5,771 पेड़ लगाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन साल 2023 से अब तक उसने एक भी पेड़ नहीं लगाया किंतु अब 10 हजार पेड़ लगाने के लिए तैयार है।
बारिश के पहले पौधारोपण का सुझाव
सुनवाई के दौरान बताया गया कि भले ही प्रतिवादी ने अब तक आदेश का पालन नहीं किया है, लेकिन अब वह अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए 10,000 पेड़ लगाने के लिए तैयार है। अदालत में स्पष्ट किया गया कि यह कोई विरोधी मुकदमा नहीं है और सभी यही चाहते हैं कि नागपुर में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं।
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अदालत मित्र की ओर से सुझाव दिया गया कि मौजूदा समय में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, इसलिए अगर अभी पेड़ लगाए गए तो वे भीषण गर्मी की वजह से मर जाएंगे। इसलिए मनपा की निगरानी में मानसून (बारिश) से ठीक पहले इन पेड़ों को लगाया जाना चाहिए।
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अदालत ने मनपा से मांगा जवाब
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाई कोर्ट (High Court) ने पेड़ न लगाने की इस घोर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए मनपा से जवाब मांगा गया कि जब प्रतिवादी ने पेड़ नहीं लगाए, तो मनपा ने उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की? इसके साथ ही अदालत ने एक सप्ताह के भीतर लगाए गए पेड़ों की संख्या और उनके जीवित रहने की दर का विस्तृत विवरण जमा करने का मौखिक निर्देश दिया।
मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जेमीनी कासट ने कहा कि पेड़ों की कटाई के बदले नए पेड़ लगाने को लेकर एक अन्य जनहित याचिका में अदालत (High Court) यह आदेश दे चुकी है कि इसके बिना पेड़ काटने की कोई अनुमति जारी नहीं की जाएगी। हालांकि इस मामले में प्रतिवादी को पेड़ काटने की अनुमति उस आदेश के पारित होने से पहले ही मिल गई थी।
