हाई कोर्ट में एयरपोर्ट अथॉरिटी की हार, 28 दिन की देरी माफ हुई, लेकिन 'मेरिट' पर याचिका हुई फेल

Nagpur High Court Airport: नागपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। अवैध निर्माण होने पर भी होगा एयरोनॉटिकल सर्वे। एयरपोर्ट अथॉरिटी की पुनर्विचार याचिका खारिज। जानें क्या है GSR 751 (E) नियम।
Nagpur HC dismisses Airport Authority of India's review petition. Court rules that an aeronautical survey can be conducted even for illegal or irregular buildings.
एयरपोर्ट अथोरिटी की हार (AI Generated Image)
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Airport Authority of India: नागपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने आदेश जारी करते हुए कहा कि यदि कोई इमारत या ढांचा अवैध अथवा अनियमित है, तो भी उसका एयरोनॉटिकल या सीएनएस सिमुलेशन सर्वे किया जा सकता है। इन तथ्यों के साथ हाई कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।

उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Airport Authority of India) ने हैगवुड कमर्शियल डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (और अन्य) के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अथॉरिटी की ओर से अधिवक्ता देउल पाठक और कम्पनी की ओर से अधिवक्ता एस।पी। बोधलकर ने परवी की।

28 दिन की देरी को मिली माफी

मामले की सुनवाई की शुरुआत में अदालत ने पाया कि इस मामले में मुख्य विरोधी पक्ष हैगवुड डेवलपर्स है। अदालत ने आवेदन में बताए गए कारणों पर विचार करते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में हुई 28 दिनों की देरी को माफ कर दिया। मुख्य पुनर्विचार याचिका पर बहस करते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी के वकील ने दलील दी कि चूंकि विवादित ढांचा मूल रूप से ही अवैध है, इसलिए इसका कोई भी सर्वेक्षण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अथॉरिटी ने पुराने फैसले पर पुनर्विचार के लिए केवल इसी तर्क को अपना आधार बनाया था। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पिछले आदेश के रिकॉर्ड में कोई भी स्पष्ट त्रुटि नहीं है। इसलिए अदालत ने एयरपोर्ट अथॉरिटी (Airport Authority) की पुनर्विचार याचिका में कोई भी योग्यता न पाते हुए उसे आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया।

एनओसी नहीं, तो अवैध निर्माण

अदालत ने एयरपोर्ट अथॉरिटी की दलील को नामंजूर कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि 8 जुलाई 2025 को दिए गए फैसले के पैराग्राफ 21 और 22 में इस मुद्दे पर पहले ही विस्तार से विचार किया जा चुका है। अदालत ने अपने पुराने फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत ने माना था कि यदि डेवलपर द्वारा बनाया गया ढांचा 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' के बिना बनाया गया है, तो उसे अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा जा सकता है, लेकिन सर्वे का मुद्दा तय करने के लिए निर्माण की स्थिति (वैध या अवैध) प्रासंगिक नहीं है।

भले ही किसी निर्माण की NOC रद्द कर दी गई हो या वह पूरी तरह से अवैध और अनियमित हो। इसके आधार पर नियम GSR 751 (E) के तहत 'एयरोनॉटिकल स्टडी' या 'सीएनएस सिमुलेशन स्टडी' कराने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा सर्वे रोकने के लिए कोई भी वैधानिक पाबंदी नहीं है।

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